Standing Committee Meeting On Operation Sindoor: विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को एक संसदीय समिति को बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष हमेशा पारंपरिक दायरे में रहा और पड़ोसी देश की ओर से कोई परमाणु संकेत नहीं दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि मिसरी ने सरकार के रुख को दोहराया कि सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय द्विपक्षीय स्तर पर लिया गया था, क्योंकि कुछ विपक्षी सदस्यों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्ष को रोकने में उनके प्रशासन की भूमिका को लेकर बार-बार किए गए दावों को लेकर सवाल उठाया।
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद की स्थायी समिति को दी गई जानकारी
सूत्रों ने बताया कि कुछ सांसदों ने पूछा कि क्या पाकिस्तान ने संघर्ष में चीनी मंचों का इस्तेमाल किया है। मिसरी ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि भारत ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को तबाह कर दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, कांग्रेस के राजीव शुक्ला और दीपेंद्र हुड्डा, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और भारतीय जनता पार्टी की अपराजिता सारंगी एवं अरुण गोविल आदि ने भाग लिया। यह बैठक भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू करने और उसके बाद दोनों देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई। भारत और पाकिस्तान 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए सहमत हुए थे।
विदेश सचिव ने कई सवालों का किया सामना
बैठक में विदेश सचिव ने सदस्यों द्वारा कई कड़े सवालों का सामना किया, जैसे कि ट्रंप का भारत-पाक तनाव के बीच में आना? परमाणु खतरा, कथित रूप से भारतीय विमानों का गिराया जाना और सोशल मीडिया पर ट्रोल होने जैसे सवालों से उन्हें दो-चार होना पड़ा। एक विपक्षी सदस्य ने पूछा कि ट्रंप ने सात बार दावा किया कि उन्होंने संघर्षविराम में मध्यस्थता की है। बार-बार ट्रंप की ओर से संघर्षविराम के मुद्दे पर दावे को लेकर हम चुप कैसे रहे?
ट्रंप ने बार-बार कश्मीर का ज़िक्र क्यों किया?
विदेश सचिव से यहां तक पूछा गया कि ट्रंप ने बार-बार कश्मीर का ज़िक्र क्यों किया? एक अन्य सदस्य ने पूछा कि सरकार चुप क्यों है? सूत्रों के अनुसार सरकार ने कहा कि यह सच नहीं है और भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम द्विपक्षीय स्तर पर हुआ था। स्थायी समिति की बैठक में विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से कोई परमाणु संकेत नहीं है। सूत्रों ने बताया कि विदेश सचिव ने कहा कि भारत-पाक संघर्ष पूरी तरह पारंपरिक युद्ध तक सीमित रहा और पाकिस्तान की ओर से परमाणु संकेत का कोई प्रमाण नहीं था।
क्या चीनी हथियारों का इस्तेमाल हुआ?
विपक्षी सदस्यों ने पूछा कि क्या चीनी हथियारों का इस्तेमाल हुआ? सूत्रों के अनुसार विदेश सचिव ने जवाब दिया, क्या फर्क पड़ता है क्या इस्तेमाल हुआ, हमने उनके एयरबेस ध्वस्त किए, यही मायने रखता है। एक अन्य सदस्य ने पूछा कि कितने विमान खोए गए, जिस पर विदेश सचिव ने कहा कि यह सुरक्षा से जुड़ा मामला है, वह इस पर बात नहीं कर सकते। जयशंकर की टिप्पणी पर कहा गया कि विदेश मंत्री के बयान को ग़लत ढंग से नहीं पढ़ना चाहिए। हमने ऑपरेशन सिंदूर के पहले चरण के बाद पाकिस्तान को सूचित किया था कि हम केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, यही बात एस. जयशंकर ने मीडिया से कही थी।
कोई विशेष प्रस्ताव पारित नहीं हुआ
विदेश मामलों पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, कोई विशेष प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। कई सदस्यों की इच्छा थी कि विदेश सचिव के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए प्रस्ताव पारित किया जाए। विदेश मंत्रालय और विदेश सचिव खुद ऐसा प्रस्ताव नहीं लाना चाहते थे। हम उनके विचार का सम्मान करते हैं, लेकिन हम सभी सदस्यों की ओर से विदेश सचिव के प्रति समर्थन और एकजुटता की भावना से आपको अवगत कराते हैं।
इस दौरान सदस्यों ने पूछे सवाल
- अमेरिका पर पाकिस्तान को FATF सूची में डालने का क्या दबाव डाला जा रहा है?
- तुर्की पर क्या दबाव डाला जा रहा है?
- भारत की आधिकारिक स्थिति क्या है, जब पूरी बात सोशल मीडिया ट्रोल्स द्वारा नियंत्रित हो रही है?
- क्या सोशल मीडिया ट्रोल्स नीति-निर्धारण को प्रभावित कर रहे हैं?
- सोशल मीडिया पर तुर्की और अज़रबैजान को बैन करने की बातों का क्या?
- अंत में सदस्यों ने पूछा, भारत राजनयिक रूप से अलग-थलग क्यों है?
