1931 में आज के दिन क्यों दी गई थी 'भगत सिंह' को फांसी, देश के युवाओं में कैसे इस क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी ने छोड़ी अपनी छाप?

Bhagat Singh Special News: भगत सिंह का जन्म 1907 में फैसलाबाद जिले (जिसे पहले लायलपुर कहा जाता था) के बंगा गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है।

Shaheed Diwas 2026: भारत आज भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु और सुखदेव थापर की पुण्यतिथि के अवसर पर 'शहीद दिवस' मना रहा है। ये तीनों क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें 23 मार्च, 1931 को लाहौर की सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी। भगत सिंह, जो एक करिश्माई समाजवादी लीडर थे, उनका जन्म 1907 में फैसलाबाद जिले (जिसे पहले लायलपुर कहा जाता था) के बंगा गांव में हुआ था। यह स्थान अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है। अंग्रेजों के विरुद्ध उनके दो हिंसक कृत्य और उसके बाद 23 वर्ष की आयु में उन्हें दी गई फांसी ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक लोक नायक बना दिया।

1931 में आज के दिन क्यों दी गई थी 'भगत सिंह' को फांसी

1931 में आज के दिन क्यों दी गई थी 'भगत सिंह' को फांसी

सिंह ने तेरह साल की उम्र में अपनी औपचारिक शिक्षा छोड़ दी और बहुत कम उम्र में ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। जब उनके माता-पिता ने उनकी शादी करवाने की कोशिश की, तो वे घर छोड़कर कानपुर चले गए।

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