महिला जजों की संख्या पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जताई नाराज़गी

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  • Updated Aug 30, 2025, 04:39 PM IST

बार एसोसिएशन का कहना है कि न्यायपालिका में लैंगिक संतुलन से न केवल बराबरी और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, बल्कि इससे जनता का विश्वास और भी मजबूत होगा और न्यायिक दृष्टिकोण विविधता से भरपूर होंगे।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने देश की अदालतों में महिलाओं की बेहद कम मौजूदगी पर गहरी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने कहा कि यह स्थिति न्यायपालिका की विविधता और बराबरी के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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हाईकोर्ट में महिला जजों की कमी

बार एसोसिएशन ने बताया कि उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर हाईकोर्ट में इस समय एक भी महिला जज नहीं है। पूरे देश में हाईकोर्ट जजों के लगभग 1100 पद हैं, जिनमें से करीब 670 पुरुषों के पास हैं जबकि सिर्फ 103 पदों पर ही महिलाएं कार्यरत हैं।

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