सरदार पटेल जयंती : बिखरी रियासतों से अखंड भारत तक... लौह पुरुष के 5 फैसले, जिन्होंने बदल दी देश की तस्वीर

राष्ट्रीय एकता दिवस पर गुजरात के केवड़िया में स्थित 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' हर साल लोगों को पटेल की याद दिलाती है। लगभग 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में गिनी जाती है। लेकिन असली स्मारक वह भारत है जो आज एक सूत्र में बंधा है।

Sardar Patel Jayanti: आज 31 अक्टूबर है। 1875 में इसी दिन गुजरात के नडियाद में एक किसान परिवार में वल्लभभाई झावेरभाई पटेल का जन्म हुआ था। देश उन्हें सरदार पटेल और लौह पुरुष के नाम से जानता है। 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, और इसकी वजह साफ है। जब 1947 में अंग्रेज गए, तो भारत एक देश नहीं, बल्कि सैकड़ों टुकड़ों का जोड़ था। उन टुकड़ों को जोड़कर एक नक्शा बनाने का काम सबसे ज्यादा पटेल के नाम दर्ज है।

Patel sardar

31 अक्टूबर को देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल की जयंती। तस्वीर-AI

बिखरे हुए भारत की चुनौती

ब्रिटिश भारत सीधे अंग्रेजी शासन के अधीन प्रांतों और करीब 560 से अधिक रियासतों में बंटा था। आजादी के कानून के तहत इन रियासतों को यह विकल्प मिला कि वे भारत में मिलें, पाकिस्तान में मिलें या स्वतंत्र रहें। यह स्थिति देश के भविष्य के लिए खतरनाक थी। अगर कुछ रियासतें अलग रह जातीं, तो भारत का भूगोल, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था, तीनों कमजोर पड़ सकते थे। इसी संकट में पटेल ने अपनी असली भूमिका निभाई।

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