Sachin Pilot: क्या सचिन पायलट की राह कांग्रेस से अलग होगी। क्या वो कांग्रेस में बने रहेंगे। इस पर सस्पेंस बरकरार है, बताया जा रहा है कि 11 जून को वो अपने पिता के पूण्यतिथि पर राजनैतिक दल का ऐलान कर सकते हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि अगर वो किसी राजनैतिक दल का ऐलान भी करते हैं तो वो तारीख 11 जून नहीं होगी। कांग्रेस से अलग राह पकड़ने की सूरत में यह कहा जा रहा है कि गुर्जर समाज के प्रभुत्व वाले इलाकों में निश्चित तौर पर वो कांग्रेस का नुकसान करेंगे। इन सबके बीच राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का कहना है कि सचिन पायलट नाराज नहीं हैं। जिन मुद्दों पर भी असहमति है उन मुद्दों पर आलाकमान खुले दिल से सुलह के लिए तैयार है।
सचिन पायलट, कांग्रेस के कद्दावर नेता
सुलह का फॉर्मूला तैयार लेकिन बताएंगे नहीं
रंधावा ने कहा कि सुलह के लिए जो फॉर्मूला तैयार है उसके बारे में सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों को है, दिल्ली जब दोनों लोग पहुंचे और कांग्रेस आलाकमान से बातचीत हुई तो दोनों ने इस बात पर हामी भरी कि पार्टी का हित उनके लिए सर्वोच्च है। हालांकि जयपुर पहुंचने के बाद सचिन पायलट ने अपने पुराने तेवर अख्तियार किए और कहा कि जिन मुद्दों पर वो ठोस कार्रवाई चाहते हैं अगर उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वो आगे की रणनीति बनाएंगे।
क्या कहते हैं जानकार
अब सवाल है कि आखिर सचिन पायलट स्पष्ट तौर पर कोई फैसला क्यों नहीं कर पा रहे हैं। इस सवाल के जवाब में जानकार कहते हैं कि अलग पार्टी बनाकर और उसे लंबे समय तक चला पाना आसान काम नहीं है। इसके अलावा आप खास समाज का नेता बनकर किसी भी जीत या हार का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन सत्ता पर वही काबिज होगा जिसे हर वर्ग और समाज का समर्थ हासिल हो। अगर आप सचिन पायलट की राजनीति को देखें तो यह बात सच है कि 2018 के चुनाव में उनकी मेहनत का नतीजा कांग्रेस को मिला। लेकिन कांग्रेस की कामयाबी में वो एकलौते योगदान करने वाले नहीं थे।
