John Brittas Rajya Sabha MP Delhi Police Assault: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास (John Brittas) ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। सांसद का दावा है कि मीडियाकर्मियों से बात करने के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की, उन्हें जबरन पुलिस वाहन में घसीटकर ले जाया गया, उनके साथ मारपीट की गई और बाद में सुनसान सड़क किनारे छोड़ दिया गया।
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास का दिल्ली पुलिस पर सनसनीखेज आरोप, कहा- पुलिस वाहन में पीटा गया; राष्ट्रपति और CJI से हस्तक्षेप की मांग
इस घटना के बाद सांसद जॉन ब्रिटास ने इसे केवल खुद पर हमला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और संसदीय विशेषाधिकारों पर हमला करार दिया है। उन्होंने मामले में तुरंत संज्ञान लेने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यसभा के सभापति और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर न्यायिक हस्तक्षेप और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
'सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कुछ ही घंटों बाद हुई घटना'- ब्रिटास
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बयान जारी करते हुए और शीर्ष संवैधानिक प्राधिकारियों को भेजे गए अपने पत्र में ब्रिटास ने घटना का विवरण साझा किया।
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा, 'मीडिया से बात करना मेरा संवैधानिक अधिकार है। पुलिस अधिकारियों ने मुझे जबरन उठाकर वाहन में डाला, दुर्व्यवहार और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और फिर सड़क किनारे फेंक दिया। यह सीधे तौर पर एक जन प्रतिनिधि के संसदीय विशेषाधिकार का हनन है।'
सांसद ने ध्यान दिलाया कि यह घटना सुप्रीम कोर्ट द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की सुरक्षा और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर दिए गए निर्देशों के कुछ ही घंटों के भीतर घटी, जो कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्रपति, सभापति और CJI से की गई मुख्य मांगें
सांसद ब्रिटास ने अपने पत्र में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
जवाबदेही तय हो: घटना में शामिल संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ आपराधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
संसदीय विशेषाधिकार समिति को मामला भेजा जाए: एक निर्वाचित सांसद के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) द्वारा जांच कराई जाए।
न्यायिक हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेकर नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी करे।
