Times Network National Defence Conclave 2026: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टाइम्स नेटवर्क नेशनल डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि पड़ोसी देश की किसी भी ‘नापाक हरकत’ का भारत पिछली बार से भी ज्यादा कड़ा जवाब देगा। उन्होंने कहा, “शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को कभी भी कमजोरी नहीं समझना चाहिए।”
टाइम्स नेटवर्क नेशनल डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
टाइम्स नेटवर्क नेशनल डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के सुरक्षा बलों के बदलते दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने दावा किया, “2014 के बाद से आतंकवादियों की सक्रिय रहने की अवधि एक साल से भी कम रह गई है। दूसरे शब्दों में, भारत के खिलाफ हथियार उठाने वाले ज्यादातर आतंकवादी एक साल के भीतर ही हमारे सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराए गए हैं। भारतीय सशस्त्र बल अब आतंकवाद की जड़ों तक पहुंच रहे हैं और उन्हें पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए काम कर रहे हैं।”
देश के रक्षा उद्योग की बढ़ती पहुंच का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, “भारत 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्यात भी कर रहा है। हम ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं, जो न केवल भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करता है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है।”
उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के बीच संबंध पर जोर दिया। सरकार ने वर्ष 2026 के लिए दो लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत खरीद बजट का 75 प्रतिशत, यानी लगभग 1.39 लाख करोड़ रुपये, घरेलू रक्षा उद्योग के लिए निर्धारित किया गया है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने हिंद महासागर के वैश्विक महत्व, समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और ड्रोन तकनीक पर भारतीय नौसेना के बढ़ते फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “हिंद महासागर क्षेत्र पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसकी अहमियत सिर्फ इसलिए नहीं है कि यहां ऊर्जा, पेट्रोलियम उत्पादों और अन्य वस्तुओं का उत्पादन करने वाले देश स्थित हैं, बल्कि इसलिए भी है कि वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।”
समुद्री सुरक्षा को लेकर नौसेना की रणनीति समझाते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा, “हम घटनाक्रम पर नजर रखते हैं, इस क्षेत्र में आने-जाने वाले जहाजों की निगरानी करते हैं, संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करते हैं और पहले से ही अपनी तैनाती की कोशिश करते हैं। इससे जरूरत पड़ने पर हम पहले से मौजूद, तैयार और कार्रवाई के लिए सक्षम रहते हैं।”
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना लंबे समय से समुद्री व्यापार के अहम मार्गों और संकरे समुद्री रास्तों के महत्व को समझती रही है। यह कोई नई समझ नहीं है। दशकों से रणनीतियां और परिचालन संबंधी तैनाती की योजनाएं बनाते समय नौसेना इन मार्गों को महत्वपूर्ण मानती रही है। ये न केवल भारत की आर्थिक सुरक्षा, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए भी अहम हैं।
भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ने के बीच टाइम्स नेटवर्क नेशनल डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 में सैन्य नेतृत्व, नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, रणनीतिक विशेषज्ञों, उद्योग जगत के दिग्गजों और इनोवेटर्स ने देश के रणनीतिक भविष्य पर चर्चा की।
कॉन्क्लेव में सैन्य ताकत, तकनीकी नवाचार, रणनीतिक कूटनीति और स्वदेशी क्षमताओं के समन्वय पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य वैश्विक सुरक्षा शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार करना था।
