राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लेकर केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और भूपेंद्र यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा तक के प्रभाव वाले इलाकों में मुकाबला एकतरफा नहीं रहा। कई नगर निकायों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवार बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव में बड़े उलटफेर।
भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भाजपा स्पष्ट बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं पहुंच सकी है। यहां कुल 65 सीटों में भाजपा को 20, कांग्रेस को 7 और अन्य उम्मीदवारों को 38 सीटें मिली हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निजी वार्ड से भाजपा प्रत्याशी जीत दर्ज करने में सफल रहा। लेकिन पूरे जिले के निकाय चुनाव के आंकड़ों में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
जयपुर में भाजपा आगे, कांग्रेस दूसरे नंबर पर
वहीं, राजधानी जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में से 131 के नतीजे सामने आए हैं। इनमें भाजपा ने 71 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को 46 और अन्य उम्मीदवारों को 14 सीटें मिली हैं। जयपुर में भाजपा फिलहाल बढ़त बनाए हुए है और उपलब्ध नतीजों के आधार पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नजर आ रही है।
अर्जुनराम मेघवाल के क्षेत्र बीकानेर में कांग्रेस मजबूत
केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के क्षेत्र बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने बढ़त बनाकर भाजपा को बड़ा झटका दिया है। 80 सीटों में से 78 के नतीजे सामने आए हैं। कांग्रेस ने 42 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा को 25 और अन्य उम्मीदवारों को 11 सीटें मिली हैं। इन आंकड़ों के साथ कांग्रेस बोर्ड बनाने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
भूपेंद्र यादव के गृह जिले अलवर में भी भाजपा को स्पष्ट बोर्ड नहीं
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के गृह जिले अलवर में भी भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। कुल 65 सीटों में भाजपा ने 28, कांग्रेस ने 24 और अन्य उम्मीदवारों ने 13 सीटें जीती हैं।भाजपा सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी है, लेकिन बहुमत के लिए उसे अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी।
जोधपुर में गहलोत-शेखावत की प्रतिष्ठा दांव पर
जोधपुर नगर निगम का चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा था। यहां 100 में से 99 सीटों के रुझान/नतीजे सामने आए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली हैं, जबकि अन्य के खाते में 11 सीटें गई हैं। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है और उनके समर्थन से ही बोर्ड का गठन संभव होगा। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अपने वार्ड में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है।
भाजपा के गढ़ अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी
अजमेर नगर निगम को भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार कांग्रेस ने यहां बड़ा उलटफेर किया है। कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा को 32 और अन्य उम्मीदवारों को 11 सीटें मिली हैं। नतीजे बताते हैं कि भाजपा के पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी स्थिति मजबूत की है।
कोटा में भाजपा को बहुमत
कोटा नगर निगम में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया है। 100 सीटों में से 90 के नतीजे सामने आए हैं। भाजपा को 52, कांग्रेस को 33 और अन्य उम्मीदवारों को 5 सीटें मिली हैं। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है।
मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस आगे
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में भी पार्टी को झटका लगा है। कांग्रेस 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। भाजपा को 21 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 15 सीटें मिली हैं। पाली में बहुमत का आंकड़ा 33 है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत के करीब है और निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सबसे बड़ा झटका मदन राठौड़ को अपने ही वार्ड में लगा, जहां भाजपा प्रत्याशी चुनाव हार गया।
वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में भाजपा का सफाया
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक गढ़ झालावाड़ नगर परिषद में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस ने 45 में से 29 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। भाजपा महज 13 सीटों पर सिमट गई। आम आदमी पार्टी ने एक और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो वार्डों में जीत दर्ज की।
डोटासरा के गृह क्षेत्र में कांग्रेस को भी झटका
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका में भी कांग्रेस स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी। कुल 45 वार्डों में कांग्रेस को 20, भाजपा को 15 और अन्य उम्मीदवारों को 10 सीटें मिली हैं। यहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन बोर्ड बनाने के लिए उसे अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।टीकाराम जूली के गृह क्षेत्र में भी कांग्रेस को झटका
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के गृह क्षेत्र अलवर में भी कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कड़ा रहा और कांग्रेस को सत्ता विरोधी समीकरणों से जूझना पड़ा।
दिग्गजों के गढ़ में बदले समीकरण
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों के ये नतीजे सिर्फ स्थानीय चुनाव तक सीमित नहीं हैं। इनसे राज्य की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के जमीनी प्रभाव को लेकर भी संकेत मिल रहे हैं। भाजपा जहां जयपुर और कोटा जैसे महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्रों में मजबूत नजर आई है, वहीं बीकानेर, अजमेर, झालावाड़ और पाली जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। जोधपुर में दोनों प्रमुख दलों के बराबर प्रदर्शन ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
