NEET-UG 2026 पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर जारी आंदोलन के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी "भारत के इतिहास के सबसे ज्यादा युवा-विरोधी प्रधानमंत्री" करार दिया। साथ ही कहा कि कथित रूप से लगातार सामने आए परीक्षा विवादों के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा तक नहीं लिया गया।
राहुल गांधी का सरकार पर निशाना
पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश में 152 पेपर लीक की घटनाओं से 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों को उठाना पड़ा।
'पेपर लीक के जिम्मेदार लोग खुले घूम रहे'
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि जब छात्र शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, तब उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है। वहीं, पेपर लीक के जिम्मेदार लोग खुले घूम रहे हैं, जबकि अपने अधिकारों की मांग करने वाले छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है और उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार न केवल युवाओं की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है, बल्कि उनके विरोध प्रदर्शनों को भी दबाने का प्रयास कर रही है।
प्रियंका गांधी ने कसा तंज
इससे पहले कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया था। छात्रों के संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार को घेरा और कहा कि हम सब चर्चा की मांग कर रहे हैं। शिक्षा नीति में कई समस्याएं और बड़े मुद्दे हैं। फिर भी, आप इस पर चर्चा करने को तैयार नहीं हैं; इसके बजाय, आप छात्रों पर आंसू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी पिटाई कर रहे हैं। किसलिए? वे हमारे बच्चे हैं।
जून से जारी है आंदोलन
गौरतलब है कि नीट यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर ये आंदोलन लगातार जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन शुरू किया था। संगठन का आरोप है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक, CBSE कक्षा 12 के पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियां और CUET परीक्षा में देरी जैसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं। संगठन का कहना है कि इन मामलों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।वांगचुक 23 दिनों से भूख हड़ताल पर
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 20 जून को जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन से जुड़े थे। सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद उन्होंने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। सोमवार को उनकी भूख हड़ताल का 23वां दिन रहा। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। CJP ने इसे जबरन कार्रवाई बताते हुए उनकी बिना शर्त रिहाई की मांग दोहराई है।
