कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाए जाने की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के मुख्य सिद्धांत असत्य और हिंसा हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया जाना गलत था।
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बोला हमला।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर केंद्र सरकार पर जवाबदेही से बचने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या जैसे मुद्दे देश के भविष्य के लिए बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर आवाज उठाने वालों को कोई भी ताकत नहीं रोक सकती।
क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने कहा, "मोदी सरकार के मुख्य सिद्धांत असत्य और हिंसा हैं। सोनम वांगचुक जी को जंतर-मंतर से हटाना, जबकि वे अहिंसक भूख हड़ताल पर थे, गलत है।" उन्होंने आगे कहा कि छात्रों से जुड़े अहम मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए, न कि विरोध की आवाज को दबाना चाहिए।दिल्ली पुलिस ने कैसे की कार्रवाई?
वहीं, इससे पहले सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती तबीयत को देखते हुए और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश तथा डॉक्टरों की सलाह के आधार पर शुक्रवार रात कार्रवाई की योजना बनाई गई। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब पांच बजे जंतर-मंतर पर विशेष रणनीति अपनाई गई। इस दौरान जंतर-मंतर पर मोबाइल नेटवर्क जैमर लगाया गया, सफेद चादर से मंच को ढका और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
सूत्रों ने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और चिकित्सकीय सलाह के बाद शुक्रवार रात ही इस कार्रवाई की योजना तैयार कर ली गई थी।
एक मिनट से भी कम समय में कैसे जंतर-मंतर से वांगचुक को ले गई पुलिस
सूत्रों के अनुसार, रात करीब 1:30 बजे पुलिस मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश मिला कि सोनम वांगचुक की तत्काल चिकित्सकीय जांच सुनिश्चित की जाए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाए।
इसके बाद, नयी दिल्ली जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मंदिर मार्ग थाने में एकत्र हुए और पूरी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की। इतना ही नहीं, यह आकलन करने के लिए विशेष अभ्यास किया गया कि वांगचुक को बिना किसी टकराव के एक मिनट से भी कम समय में कैसे जंतर-मंतर से ले जाया जाए।
सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने यह भी चर्चा की कि कार्रवाई के दौरान मोबाइल नेटवर्क जैमर लगाए जाएं, ताकि घटनास्थल के वीडियो तुरंत सोशल मीडिया पर प्रसारित न हो सकें। इन चादरों का उद्देश्य कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों को वीडियो बनाने तथा उसे तुरंत सोशल मीडिया पर साझा करने से रोकना था।
एक सूत्र ने कहा कि सरकार को डर था कि यदि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के वीडियो तुरंत वायरल हो जाते, तो जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जुट सकते थे।उन्होंने बताया कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस नहीं चाहती थी कि प्रदर्शन स्थल पर भीड़ इकट्ठा हो।
पुलिस ने क्या कहा?
नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश, चिकित्सकीय सलाह और वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें आवश्यक इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं।20 दिनों से अनशन पर थे वांगचुक
सोनम वांगचुक पिछले करीब 20 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। उनके समर्थन में कई सामाजिक संगठनों और छात्रों ने भी प्रदर्शन किया। पुलिस का कहना है कि संसद के मानसून सत्र से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने और वांगचुक की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई की गई।
