Dharmendra Pradhan Resignation: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा कि धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली में छात्रों का आंदोलन शुरू होने के पहले ही दिन अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय (फाइल फोटो)
इंदौर में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधान ने भाजपा अध्यक्ष से कहा था कि अगर उन्हें लगता है कि इस्तीफा देना जरूरी है, तो वह शिक्षा मंत्री के पद से हटने के लिए तैयार हैं।
विजयवर्गीय ने कहा, ''प्रधान के इस्तीफे ने उन विदेशी ताकतों के इरादों को नाकाम किया, जो हिंसा फैलाकर देश को अस्थिर करना चाहती थीं, जैसा बांग्लादेश और श्रीलंका में हुआ था। उन्होंने जो किया, उसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं।''
सनद रहे कि धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और फिर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों की मांगों को भी मान लिया। इसके बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी आंदोलन को वापस ले लिया और छात्रों से शांतिपूर्वक घर जाने की अपील की। रात होते-होते जंतर-मंतर पूरी खाली हो गया। दरअसल, आंदोलनकारी छात्र परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर एकजुट हुए थे।
विजयवर्गीय का चौंकाने वाला दावा
बकौल विजयवर्गीय, छात्र आंदोलन के पहले ही दिन प्रधान ने भाजपा अध्यक्ष से कहा था कि अगर उनको लगता है कि यह देना जरूरी है, तो वह शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। विजयवर्गीय ने आगे कहा, ''भाजपा अध्यक्ष ने प्रधान से कहा कि इस मुद्दे पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है और जब तक कोई फैसला नहीं हो जाता, उन्हें न तो अपना इस्तीफा देना चाहिए और न ही किसी से इस पर बात करनी चाहिए।''
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उन्होंने कहा कि जब बाद में हालात बदले और पार्टी ने तय किया कि प्रधान को पद छोड़ देना चाहिए, तो उन्होंने तत्काल इस्तीफा दे दिया।
विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर कसा तंज
प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के जश्न पर विजयवर्गीय ने तंज कसते हुए एक हिंदी कहावत का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी 'पड़ोसी के घर में बच्चे के जन्म पर ढोल पीट रही है।'
उन्होंने कहा, ''छात्र आंदोलन में कांग्रेस की क्या भूमिका थी? छात्र ने आंदोलन शुरू किया और कांग्रेस सिर्फ उनके पीछे खड़ी रही। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद विपक्ष पूरी तरह से हताश हो गया और निराशा की स्थिति में सीजेपी में उन्हें उम्मीद की एक किरण मिली।''
