PDA Rath Yatra: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की गुरुवार से PDA रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है। खास बात यह है कि इस रथ यात्रा की शुरुआत कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से हो रही है। सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बनी रथ यात्रा की शुरुआत से पहले रायबरेली में पोस्टर वार शुरू हो गया है। अखिलेश के समर्थन और विरोध में पोस्टर लगे हैं। शहर में कई जगह ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें अखिलेश यादव के साथ आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें दिखाई गई हैं। पोस्टरों पर सपा प्रमुख को लेकर कई आपत्तिजनक स्लोगन भी लिखे गए हैं।
रायबरेली से पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत।
अखिलेश के पहुंचने से पहले पोस्टर-बैनर वार
रथ यात्रा के लिए रायबरेली पहुंचने से पहले अखिलेश यादव के विरोध में बैनर व पोस्टर वार शुरू है। एक होर्गिंड में सपा प्रमुख को भगवान राम के रूप में दिखाया गया है। इसमें लिखा है 'श्री राम का है स्पष्ट संदेश, 2027 में जनता चुने अखिलेश'। इसके अलावा होर्डिंग में लिखा है कि अखिलेश कलयुग के 'भगवान' हैं। अखिलेश के विरोध में लगे पोस्टर में सपा प्रमुख को वापस जाओ की बात लिखी गई है। बैनर में लिखा है कि आजम अतीक और मुख्तार यही सरकार चलाते थे।
पोस्टर किसने लगवाए फिलहाल पता नहीं
पोस्टर सामने आने के बाद रायबरेली में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। हालांकि, इन पोस्टरों को किसने लगवाया है, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। प्रदेश के अन्य शहरों में भी हाल के दिनों में अखिलेश यादव के खिलाफ इसी तरह के पोस्टर लगाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
चुरुआ से PDA रथ पर सवार होंगे अखिलेश
पार्टी के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक अखिलेश यादव रायबरेली सीमा के चुरुआ से PDA रथ पर सवार होंगे और इसके बाद पार्टी विधायक राहुल लोधी के आवास भी जाएंगे।लेकिन सवाल यह है कि PDA रथ के पहिए रायबरेली की जमीन से ही क्यों घूम रहे हैं।
रथ यात्रा के सांकेतिक संदेश भी हैं
ये सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि रायबरेली सिर्फ उत्तर प्रदेश का एक जिला नहीं है। यह गांधी परिवार की राजनीत से जुड़ी जमीन है। राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण रायबरेली कांग्रेस की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में अखिलेश यादव का यहीं से PDA रथ की शुरुआत करना महज एक संगठनात्मक कार्यक्रम भर नहीं माना जा रहा। राजनीतिक गलियारों में इसे समाजवादी पार्टी की अपनी जमीन और अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी को रेखांकित करने के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
