सीबीआई 9 अगस्त की घटना की जांच कर रही है, जिसमें कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर के साथ अस्पताल परिसर में कथित तौर पर बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई CBI को अदालत से आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल और चार डॉक्टरों पर पॉलीग्राफ टेस्ट करने की अनुमति मिल गई, जिनके साथ पीड़िता ने कथित तौर पर अगली सुबह मृत पाए जाने से पहले रात का खाना खाया था।
RG कालेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और 4 डॉक्टरों का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट
सीबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक 'सीबीआई ने पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष और आरजी कर अस्पताल के चार डॉक्टरों पर पॉलीग्राफ टेस्ट करने की अनुमति मांगने के लिए सियालदह एसीजेएम अदालत का रुख किया। उन्हें गुरुवार को अदालत में ले जाया गया,अदालत ने अनुमति दे दी है।' यह घटना सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए की गई सुनवाई के बाद आई है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, ' पॉलीग्राफ परीक्षण कराने का अनुरोध एसीजेएम सियालदह के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। बताया गया है कि यह प्रक्रियाधीन है। एसीजेएम सियालदह 23 अगस्त को शाम 5 बजे से पहले आवेदन पर आदेश पारित करेंगे।'
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रेप की घटनाओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। ममता बनर्जी ने पत्र में पीएम मोदी से रेप की घटनाओं की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने लिखा है, मैं आपके ध्यान में लाना चाहती हूं कि देश भर में रेप के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई मामलों में रेप के साथ हत्या भी की जाती है।
'देश भर में प्रतिदिन लगभग 90 रेप के मामले होते हैं'
ममता बनर्जी ने आगे लिखा कि यह देखना भयावह है कि देश भर में प्रतिदिन लगभग 90 रेप के मामले होते हैं। इससे समाज और राष्ट्र का विश्वास और विवेक डगमगाता है। हम सभी का यह कर्तव्य है कि हम इसे समाप्त करें ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस करें। ऐसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को कठोर केंद्रीय कानून के माध्यम से व्यापक तरीके से संबोधित करने की आवश्यकता है, जिसमें ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कठोर सजा का प्रावधान हो।
ममता बनर्जी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग की
इसके साथ ही ममता बनर्जी ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों की स्थापना पर भी प्रस्तावित कानून में विचार किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में सुनवाई अधिमानतः 15 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
