Winter Session : संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत मंगलवार को हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा को संबोधित किया। राज्यसभा के सदस्यों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद की इस सत्र की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब देश 'आजादी का अमृत महोत्सव' मना रहा है और देश को जी-20 की अध्यक्षता करने की जिम्मेदारी मिली है। राज्यसभा के सभापति को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि 'मैं इस सदन के साथ-साथ राष्ट्र की ओर से सभापति को बधाई देता हूं। आप संघर्षों के बीच जीवन में आगे बढ़ते हुए इस मुकाम पर पहुंचे हैं, यह देश के कई लोगों के लिए प्रेरणा है। आप सदन में इस महती पद की शोभा बढ़ा रहे हैं।'
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
दुनिया की अगुवाई करेगा भारत
पीएम ने कहा, 'भारत जिम्मेदारी के साथ सतत विकास लक्ष्यं का पूरा करने में दुनिया की अगुवाई करेगा। राज्यसभा देश की सबसे बड़ी ताकत है। हमारे कई प्रधानमंत्रियों ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में काम किया है।' इससे पहले उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सभापति के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। पीएम ने आगे कहा, 'हमारी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समाज से आती है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हाशिए के समाज से आए थे। हमारा उप राष्ट्रपति किसान पुत्र हैं। वीपी को कानूनी मामलों की अच्छी जानकारी है।'
Our respected President Droupadi Murmu Ji hails from a tribal community. Before her, our former President Ramnath K… t.co/UpjW2x1tS7
— ANI (@ANI) Dec 7, 2022
संसद में हंगामे से देश को नुकसान -पीएम
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री ने संसद में हंगामे और व्यवधान के चलते देश का बहुत नुकसान होता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से शीतकालीन सत्र को अधिक से अधिक सार्थक बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिलना एक बहुत बड़ा अवसर है और यह समग्र रूप से भारत के सामर्थ्य को विश्व के सामने प्रस्तुत करने का मौका भी है। प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बहुत ही अनुकूल माहौल में हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि सत्र के दौरान इसका प्रतिबिंब देखने को मिलेगा।
'नए सांसदों को सीखने का मौका दें'
मोदी ने कहा कि सभी दलों के सांसद, खासकर युवा सांसद अक्सर उनसे मिलते हैं तो बताते हैं कि सदन में व्यवधान के कारण उनका बहुत नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि ये युवा सांसद चाहते हैं कि वे लोकतंत्र के इस विश्वविद्यालय से सीखें। उन्होंने कहा, ‘जो विपक्ष के सांसद हैं, उनका भी यही कहना है कि उन्हें संसद में बोलने का अवसर नहीं मिलता है क्योंकि हंगामे के कारण सदन स्थगित हो जाता है। इसके कारण उनका बहुत नुकसान होता है।’
