कर्नाटक के सांस्कृतिक शहर मैसूरु में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, संदेशों और आदर्शों को समर्पित 'स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र' यानी 'विवेका स्मारक' का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने श्री रामकृष्ण आश्रम द्वारा प्रकाशित महर्षि वाल्मीकि की 'रामायण' (7 खंडों में) और 'बदुकु वेदकु' (वेदांत साधुओं की कहानियों का कन्नड़ अनुवाद) का विमोचन भी किया।
मैसूरु में पीएम मोदी के मंच पर डीके शिवकुमार भी रहे मौजूद
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'विवेका स्मारक' आध्यात्मिक साधकों और युवाओं के लिए एक प्रेरणास्थल बनेगा। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जिनके लिए नेशन फर्स्ट ही जीवन का मुख्य मंत्र हो और जो व्यक्तिगत सुख-दुख से ऊपर उठकर समाज व देश सेवा को अपना धर्म समझें।
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मैसूरु से स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक संबंध
पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद और मैसूरु के बीच के 130 साल पुराने ऐतिहासिक जुड़ाव को याद किया। उन्होंने बताया कि जब स्वामी जी एक युवा संन्यासी के रूप में यात्रा कर रहे थे, तब मैसूरु के तत्कालीन महाराजा ने उनके सामर्थ्य को पहचाना और उनका सहयोग किया था। स्वामी जी ने अमेरिका से भी मैसूरु महाराजा को पत्र लिखकर उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया था। इसके साथ ही पीएम ने देश में तेजी से बढ़ रहे मेडिकल कॉलेजों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के जरिए युवाओं को दी जा रही नई दिशा पर भी प्रकाश डाला।
कर्नाटक सरकार का रुख: 'साथ मिलकर करेंगे काम'
कार्यक्रम में मौजूद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए इस आयोजन को देश के युवा आंदोलन के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। डीके शिवकुमार ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि पूरा राज्य देश की प्रगति के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहता है।
शिवकुमार ने कहा, "भारत को कर्नाटक के साथ आगे बढ़ना होगा और कर्नाटक हमेशा आपके साथ खड़ा रहेगा। आइए हम सब मिलकर काम करें और अपने देश को गौरवान्वित बनाएं।" उन्होंने प्रधानमंत्री के संदेश को देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण करार दिया।
