प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा को राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने लूला को अपना ‘प्रिय मित्र’ बताते हुए कहा कि वह भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा दोनों देशों के संबंधों का विस्तार करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हैं।
पीएम मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ।(फोटो सोर्स: MEA)
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लूला को उनकी शानदार चुनावी जीत पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राजील विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश अधिक समावेशी, समानतापूर्ण और टिकाऊ दुनिया बनाने की दिशा में भी प्रयास जारी रखेंगे।
लूला ने चौथी बार हासिल किया राष्ट्रपति पद
बता दें कि ब्राजील में 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के मतदान में 80 वर्षीय लूला दा सिल्वा ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की। इस जीत के साथ उन्होंने चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया। चुनावी अदालत के मुताबिक, लूला को 51.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2 प्रतिशत मत मिले।लूला की जीत को लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी राजनीति की बढ़ती ताकत के बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। चुनाव से पहले कुछ अनुमानों में उनके राजनीतिक करियर के अंतिम दौर में पहुंचने की बात कही जा रही थी।
लूला ने समर्थकों का जताया आभार
जीत के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए लूला ने ब्राजील की जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह देश के सभी नागरिकों का सम्मान करेंगे, चाहे उनका लिंग या धर्म कुछ भी हो। लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जीत इनकारवाद और झूठ की राजनीति की हार है। उन्होंने ब्राजील की स्वतंत्रता और संप्रभुता पर जोर देते हुए कहा कि उनका देश किसी का पिछवाड़ा बनकर नहीं रहेगा।
फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को चुनौती देने के संकेत दिए
वहीं, चुनाव में हार के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह चुनाव परिणाम रद्द कराने की मांग करेंगे। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश के उस फैसले का हवाला दिया, जिसके तहत मतदान का समय दो घंटे बढ़ाया गया था।चुनाव के पहले दौर में बढ़त हासिल करने वाले फ्लावियो को दूसरे दौर में चार लाख नहीं, बल्कि 40 लाख से अधिक मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
