अब यूनिफॉर्म सिविल कोड पर संसद को करनी होगी पहल- दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

अदालत ने कहा कि दुविधा को दूर करने के लिए संसद को तय करना होगा कि क्या पूरे समुदाय को अपराधी घोषित करना है या फिर शांति और सामंजस्य के लिए स्पष्ट कानून बनाना है। धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा हर नागरिक को दी गई है, लेकिन यह स्वतंत्रता उस हद तक नहीं जा सकती जहां लोग आपराधिक कानून दायरे में आ जाएं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ कहा कि अब समय आ गया है जब संसद यूनिफॉर्म सिविल कोड पर फैसला ले। जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानून और राष्ट्रीय कानून के बीच टकराव लोगों को अपराधी बना देता है, जबकि वे अपने धार्मिक या परंपरागत नियमों का पालन कर रहे होते हैं। कोर्ट ने ये भी कहा कि अब वक्त आ गया है जब यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने पर विचार किया जाए ताकि व्यक्तिगत या धार्मिक कानून राष्ट्रीय कानून से ऊपर न ठहरें।

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संसद यूनिफॉर्म सिविल कोड पर फैसला ले- दिल्ली हाईकोर्ट (फोटो- PTI)

क्या है ये पूरा मामला?

यह टिप्पणी उस केस में आई है, जिसमें हामिद रजा नामक युवक को नाबालिग लड़की से शादी करने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में जेल भेजा गया था। आरोप लड़की के सौतेले पिता ने लगाया था, लेकिन लड़की ने अदालत में बयान दिया कि वह वयस्क है और करीब 20 वर्ष की है और उसने अपनी मर्जी से शादी की है। दोनों ने इस्लामी कानून के तहत वैध निकाह किया और उनके यहां बच्चा भी हुआ। लड़की ने अदालत से गुहार लगाई कि उसके पति को जेल से छोड़ा जाए।

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