23 जून को पटना में सजायाफ्ताओं का होने जा रहा संगम, बीजेपी का करारा जवाब

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 15, 2023, 02:18 PM IST

23 जून को बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी दल एक मंच पर नजर आने वाले हैं। बीजेपी की इस कवायद पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने कहा कि यह एका नहीं बल्कि सजायाफ्ताओं का संगम होगा।

आगामी 23 जून को पटना में विरोधी दलों की एक संयुक्त रैली आयोजित है । इस रैली के आयोजन के महीनों पहले से विपक्षी एकता के नारे लगाए जा रहे हैं । विपक्षी जमावड़ा तो है पर इनमें एकता कहां तक जाएगी इसकी गारंटी जमावड़े में शामिल किसी नेता के पास नहीं है। इतना तय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ इन दलों में बेहद आक्रोश है । आक्रोश सहज और स्वाभाविक है ।बीते 7 दशकों से भारतीय राजनीति में एक अलिखित समझौता रहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज भले बुलंद करना है ,पर कार्रवाई के लिए अपेक्षित प्रतिबद्धता आवश्यक नहीं। इसलिए भ्रष्टाचार धीरे-धीरे सामाजिक शिष्टाचार बनने लगा। प्रधानमंत्री पद का संस्थान भ्रष्टाचार के आरोपों से मलिन होगा, यह कल्पना संविधान निर्माताओं को नहीं रही होगी । हालांकि सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में ही प्रारंभ हो गयो थे।

Prem Shukla, BJP

प्रेम शुक्ला, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता

संविधान निर्माता डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने नेहरू सरकार में भ्रष्टाचार जिस संस्थागत ढंग प्रारंभ हुआ था, उसके चलते कहा था कि "कांग्रेस एक जलता हुआ घर है। जो कोई इसके साए में भी खड़ा होगा वह भी भस्म हो जाएगा ।" नेहरू के कार्यकाल में हर्ष मूंदड़ा के भ्रष्टाचार का मामला राहुल गांधी - प्रियंका वाड्रा के पितामह फिरोज गांधी ने उठाया था । तब से आज तक कांग्रेस और राजनीतिक विमर्श में बदला क्या है ? तब भ्रष्टाचारियों से संबंध रखना भी राजनीतिक दृष्टि से अनैतिक था। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार को मान्यता मिलने का अशुभारंभ हुआ । राजीव गांधी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री निवास सोनिया गांधी के चलते भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया । उनके चलते ही पहली बार बोफोर्स ,फेयरफैक्स, पनडुब्बी घोटाले सुनाई दिए। सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्षा और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की अध्यक्षता के कार्यकाल में भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन गया । गांधी परिवार तमाम आपराधिक मामलों में जमानत पर रिहा है ।उन पर लगे आरोपों की हम छोड़ भी दें तो इससे कौन इंकार कर सकता है कि राहुल गांधी सजायाफ्ता मुजरिम हैं । कांग्रेस पार्टी किसी आरोपी को नहीं बल्कि एक सजायाफ्ता को अपना नेतृत्व बनाकर ढोने को अभिशप्त है । स्वयं सोनिया गांधी ने स्वतंत्रता काल में आंदोलनकारियों के योगदान से खड़े 'नेशनल हेराल्ड' की संपत्ति का गबन कर लिया । उन पर यह आरोप नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में नहीं लगा, बल्कि सोनिया गांधी के पति राजीव गांधी को अपना मित्र बताने वाले डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने दंडाधिकारी की अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत कर अदालती आदेश से मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई । कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी परिवार सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ा, इस कांड की जांच से मुल्जिमों को मुक्त नहीं करा पाए । सोनिया गांधी- राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई पदाधिकारी भारतीय दंड विधान की धारा 420 के मुकदमे में जमानत पर रिहा अभियुक्त हैं ।

End of Feed