Nashik TCS Case: नासिक TCS धर्मांतरण कांड की मुख्य आरोपी निदा खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। निदा को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया है। निदा पर आरोपियों की मदद करने का आरोप है। वह करीब एक महीने तक पुलिस को चकमा देती रही। इस दौरान अदालत से अग्रिम जमानत याचिका भी लेने की कोशिश की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। निदा ने अदालत में अपने गर्भवती होने का हवाला दिया था।
गिरफ्त में निदा खान
क्या है मामला?
नासिक की इस मशहूर आईटी कंपनी के ऑफिस में कई महिला कर्मचारियों ने अपने सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव का आरोप लगाया था। यह घटना फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच घटी। कई पुलिस शिकायतों के बाद इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। यह बड़ा विवाद सबसे पहले 26 मार्च को सामने आया, जब महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक बीपीओ कार्यालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि कुछ सहकर्मियों ने कई वर्षों से बार-बार उसके साथ गलत बर्ताव किया है। उसकी शिकायत में घटना का जिक्र 2022 और 2026 के बीच हुआ था। उसने यह भी आरोप लगाया कि एक पुरुष सहकर्मी ने कई बार उनका यौन शोषण और छेड़छाड़ की।
निदा खान थी फरार
नासिक टीसीएस मामले (Nashik TCS Case) में गठित एसआईटी को जारी हेल्पलाइन नंबर पर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। अब तक 20 से ज्यादा लोगों ने फोन के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिनमें से कई मामलों में आरोपियों द्वारा धार्मिक भावनाएं आहत होने से संबंधित हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि लोग फोन पर शिकायत तो कर रहे हैं, लेकिन औपचारिक रूप से सामने आकर मामला दर्ज कराने के लिए कोई तैयार नहीं हैं, जिससे आगे की कार्रवाई में दिक्कत आ रही है। अब तक इस मामले में 12 लिखित शिकायतें दर्ज की गई हैं और 9 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया, जबकि मुख्य आरोपी निदा खान अब भी गिरफ्त से बाहर थी।
कंपनी के छह टीम लीडर्स हुए थे गिरफ्तार
नासिक स्थित इस आईटी कंपनी में चल रहे यौन शोषण और धर्मांतरण की कोशिश के मामले में कंपनी के छह टीम लीडर्स, लेकिन एचआर मैनेजर निदा खान फरार थी। पुलिस का कहना था कि वहां आठ महिलाओं और एक पुरुष कर्मचारी को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित और मजबूर किया गया। नासिक मल्टीनेशनल कंपनी में कथित कॉर्पोरेट जिहाद का मामला अब एक सामान्य क्राइम केस से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन गया। इसी कारण ATS, NIA और IB जैसी केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई।
