Nandigram Bypoll: कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को दोहराया कि गिरफ्तार कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव में उचित तरीके से चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए।
मिलन प्रधान को हाई कोर्ट से बड़ी राहत (फाइल फोटो)
'प्रधान को नहीं माना जाएगा गिरफ्तार'
अदालत ने कहा कि निचली अदालत द्वारा जिस मामले में उन्हें सात अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, उसमें उन्हें गिरफ्तार नहीं माना जाएगा। नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्टूबर को होना है और चुनाव प्रचार चार अक्टूबर को समाप्त होगा।
प्रधान के वकील की दलीलों का संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि प्रधान के खिलाफ पेशी वारंट तामील किया गया था।
याचिका में कहा गया है कि 22 सितंबर को अदालत के समक्ष बताए गए 11 मामलों के अलावा 2007 के एक आपराधिक मामले में उन्हें गिरफ्तार दिखाया गया और सात अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
कोर्ट का पुलिस अधिकारियों को निर्देश
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूर्बा मेदिनीपुर जिला स्थित खेजुरी थाने के 2007 के मामला संख्या 45 में 12 अक्टूबर तक प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए और इस आपराधिक मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं माना जाए।
अदालत ने कहा, ''यह जानकर हैरानी होती है कि यह आपराधिक मामला 2007 का है और जांच अधिकारी ने 19 सितंबर को याचिकाकर्ता को 'गिरफ्तार दिखाने' के लिए आवेदन दिया।' '
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार से मौखिक रूप से कहा कि प्रधान को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए। अदालत ने 22 सितंबर को भी मौखिक रूप से पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा था कि यदि कांग्रेस उम्मीदवार उन पांच आपराधिक मामलों में जमानत हासिल कर लेते हैं, जिनमें उन्हें गिरफ्तार किया गया है, तो उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव उचित तरीके से लड़ने दिया जाए।
अदालत ने कहा कि प्रधान को 22 सितंबर के बाद खेजुरी थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तार दिखाया गया। प्रधान के वकील अयान भट्टाचार्य की दलील पर अदालत ने सवाल किया कि इस अदालत के 22 सितंबर के आदेश के बाद याचिकाकर्ता को एक और मामले में आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि राज्य सरकार ने कहा था कि उनके खिलाफ पांच ही आपराधिक मामले लंबित हैं।
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पूर्बा मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम और खेजुरी थानों में 2007 में प्रधान के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। प्रधान की ओर से छह अन्य मामलों में दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण मांगने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान 22 सितंबर को कलकत्ता हाई कोर्ट को राज्य की ओर से बताया गया था कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिये थे और छठे मामले में उनकी जरूरत नहीं थी।
अदालत को यह भी बताया गया था कि प्रधान को अन्य पांच आपराधिक मामलों में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि जब राज्य सरकार ने कहा था कि किसी अन्य मामले में उनकी जरूरत नहीं है, तो उन्हें किसी और मामले में नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
प्रधान के वकील अयान भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें खेजुरी थाने के 2007 के मामला संख्या 45 की जानकारी नहीं थी, और इसलिए 22 सितंबर को अदालत के समक्ष इसका उल्लेख नहीं किया गया। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि 19 सितंबर को कांथी एसीजेएम अदालत ने खेजुरी थाना मामले में प्रधान के खिलाफ पेशी वारंट जारी किया था, जिसमें उनपर हत्या, हत्या के प्रयास और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
