Bengal SIR: पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों खासकर मुर्शिदाबाद, मालदा और कूचबिहार में इन दिनों एक नया रुझान देखने को मिल रहा है।मुस्लिम समुदाय के कई विवाहित जोड़े अब स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत अपनी शादी दर्ज कराने के लिए कतार में लग रहे हैं।
मुर्शिदाबाद में SIR ने बढ़ाई मुस्लिम दंपति की चिंता!
मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे बांग्लादेश से सटे जिलों में विवाह पंजीकरण कार्यालयों में अचानक आवेदन की बाढ़ आ गई है। इनमें ज्यादातर मुस्लिम दंपत्ति हैं, जिन्होंने पहले मुस्लिम कानून के तहत निकाह पढ़ा था, लेकिन अब वे अपनी शादी को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत पंजिकृत करवा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह रुझान एआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन प्रक्रिया को लेकर बढ़ती चिंताओं से जुड़ा है। कई मुस्लिम दंपत्ति अब विवाह प्रमाणपत्र को नागरिकता के अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में देख रहे हैं।
मुर्शिदाबाद के एक मैरिज रजिस्ट्रार से प्राप्त आंकड़े
- अक्टूबर 2024: 270 आवेदन
- अक्टूबर 2025: 332 आवेदन
- नवंबर 2024: 35 आवेदन
- नवंबर 2025 (7 तारीख तक): 30 आवेदन
आवेदनों में हो रहा इजाफा
राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में आवेदन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। अधिकांश आवेदन उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार जिलों से आए हैं। ये चारों जिले बांग्लादेश की सीमा से सटे हैं। दरअसल, ग्रामीण बंगाल में मुस्लिम शादियां बंगाल मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1876 के तहत दर्ज होती हैं। इस कानून के तहत राज्य सरकार काज़ी या मोहम्मदान रजिस्ट्रार को लाइसेंस देती है। ऐसे में मुस्लिम दंपत्तियों को उम्मीद है कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत मिला प्रमाणपत्र उनकी नागरिकता या एआईआर प्रक्रिया में एक अहम दस्तावेज़ साबित हो सकता है।
