बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार की टीम में संभावित फेरबदल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार में नए चेहरों को मौका देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कवायद हो सकती है। हालांकि, कैबिनेट फेरबदल को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
मोदी सरकार में जल्द हो सकता है कैबिनेट फेरबदल | File photo, representational image
सूत्रों के मुताबिक, संभावित बदलाव में युवा चेहरों को सरकार में आगे लाने, वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव और NDA के सहयोगी दलों को अधिक प्रतिनिधित्व देने जैसे विकल्पों पर मंथन की चर्चा है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अब तक कई मंत्री 50 से 70 वर्ष के आयु वर्ग में हैं। ऐसे में पार्टी की अगली पीढ़ी के नेताओं को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी देने की संभावना को अहम माना जा रहा है।
संगठन में बदलाव के बाद सरकार पर नजर
बीजेपी संगठन में हालिया बदलावों के बाद सरकार और संगठन के बीच नए समीकरण बनने की चर्चा भी तेज हुई है। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी की जिम्मेदारी मिलने के बाद इन दोनों राज्यों में संगठनात्मक भूमिका बदली है। वहीं पीयूष गोयल को बीजेपी का कोषाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनकी संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं।ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि संगठन में जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ वरिष्ठ नेताओं और सरकार में एक से अधिक मंत्रालयों का प्रभार देख रहे मंत्रियों की जिम्मेदारियों में क्या बदलाव किया जाएगा।
वरिष्ठ मंत्रियों की भूमिका में बदलाव की चर्चा
संभावित फेरबदल की चर्चाओं में जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, अश्विनी वैष्णव और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि चुनावी और संगठनात्मक जरूरतों के हिसाब से कुछ मंत्रियों के मंत्रालयों में बदलाव या जिम्मेदारियों के पुनर्विन्यास का विकल्प खुला रखा जा सकता है। हालांकि, इन नेताओं को लेकर किसी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
NDA सहयोगियों को मिल सकता है बड़ा मौका
कैबिनेट में संभावित बदलाव में NDA के सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के बीच संभावित नए राजनीतिक समीकरणों के बीच हरसिमरत कौर बादल की केंद्र सरकार में वापसी को लेकर भी चर्चा है।
वहीं, आंध्र प्रदेश में टीडीपी के साथ गठबंधन और दक्षिण भारत में NDA के विस्तार की रणनीति को देखते हुए सहयोगी दलों को केंद्र में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
महाराष्ट्र से भी सामने आ सकता है नया चेहरा
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की NDA में भूमिका को देखते हुए श्रीकांत शिंदे का नाम भी संभावित नए चेहरों की चर्चाओं में सामने आ रहा है। इसके अलावा अलग-अलग दलों से बीजेपी में शामिल हुए नेताओं को सरकार या संगठन में जिम्मेदारी देने के विकल्प पर भी नजर हो सकती है।
2029 की तैयारी पर फोकस
संभावित कैबिनेट फेरबदल को महज मंत्रियों की संख्या बढ़ाने या घटाने के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी, आगामी विधानसभा चुनाव, राज्यों में संगठन को मजबूत करना, NDA का विस्तार और नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाना जैसे बड़े राजनीतिक लक्ष्य जुड़े हो सकते हैं।
अगर कैबिनेट में बदलाव होता है तो युवा चेहरों को मौका,क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन और NDA सहयोगियों को प्रतिनिधित्व ये तीन बड़े फैक्टर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल सभी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मोदी सरकार की अगली टीम में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है।
