Manipur Violence: हिंसाग्रस्त मणिपुर में इंटरनेट पर प्रतिबंध एक बार फिर से बढ़ाया गया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस याचिका को खारिज किए जाने के बाद आया है, जिसमें राज्य में बार-बार इंटरनेट पर प्रतिबंध के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। राज्य के दो नागरिकों की ओर से यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई थी। राज्य सरकार की ओर से नए आदेश के तहत पूरे राज्य में ब्रॉडबैंड समेत मोबाइल डेटा सेवाओं को 15 जून दोपहर तीन बजे तक प्रतिबंधित कर दिया गया है।
मणिपुर में फिर बढ़ा इंटरनेट पर प्रतिबंध
इस आदेश के बाद, मणिपुर के नागरिक करीब एक महीने से ज्यादा समय से बिना इंटरनेट रहने को मजबूर हैं। बता दें, मणिपुर में तीन जून को हिंसा भड़की थी, जिसके बाद यहां इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद से अब तक राज्य में पूरी तरह शांति व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है।
50 हजार से ज्यादा विस्थापित
मणिपुर में दो समुदायों मेइती और कुकी के बीच छिड़े संघर्ष के बाद से अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं और राहत कैंपों में रह रहे हैं। एक अधिकारिक बयान में कहा गया है कि जातीय हिंसा के कारण से कुल 50,698 लोग विस्थापित होकर 349 राहत कैंपों में रहने को मजबूर हैं। उधर, मणिपुर के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री डॉ. आरके रंजन का कहना है कि सभी जिलों में तलाशी अभियान भी शुरू किया गया है। इस बीच, जिला और क्लस्टर नोडल अधिकारियों को विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की देखभाल करने को कहा गया है।
करीब 100 लोगों की हुई मौत
मणिपुर में हुई हिंसा में अब तक करीब 100 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हिंसा में करीब 310 घायल भी हुए हैं। राज्य में हिंसा की जांच के लिए सीबीआई ने डीआईजी-रैंक अधिकारी की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। वहीं, सीबीआई जांच की निगरानी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच आयोग द्वारा की जाएगी। इस आयोग का गठन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हिंसा प्रभावित राज्य के दौरे के बाद किया गया था। इसके अलावा मणिपुर की राज्यपाल की अध्यक्षता में एक शांति समिति का भी गठन किया गया है।
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