नेता, मंत्री उतना ही बोलें, जो भगवान को भी ठीक लगे, SC की टिप्पणी से याद आई 2016 की बुलंदशहर की वो घटना

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Jan 3, 2023, 03:03 PM IST

सार्वजनिक पदों पर बैठे हुए लोगों के बोलने पर क्या बाध्यता है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 19(2 ) के तहत जो आजादी है उतना ही बोल सकते हैं। अदालत ने कहा कि पब्लिक लाइफ में रहने वालों को इस तरह से बोलना चाहिए जो भगवान को भी ठीक लगे।

सार्वजनिक पदों पर आसीन शख्सियतों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुना दिया है। जस्टिस एस एस नजीर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 19(2 ) के तहत जो निर्धारित प्रतिबंध हैं उन्हें छोड़ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध नहीं लगाए जा सकते हैं। पीठ ने कहा कि मंत्री के बयान को सीधे तौर पर सरकार के बयान से नहीं जोड़ा जा सकता है। मंत्री जो कुछ कहता है वो उसके लिए खुद उत्तरदायी है।संविधान पीठ का यह फैसला उन लोगों के लिए जो सार्वजनिक पदों पर बैठे हुए हैं और उनके भाषण या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात होती है। हालांकि पीठ में एक जस्टिस नागरत्ना की राय अलग थी।

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बोलने के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस नागरत्ना की राय थी अलग

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर कोई मंत्री अपमानजनक बयान देता है तो पूरा मंत्रिमंडल जिम्मेदार है हालांकि छिटपुट टिप्पणियों से सरकार को नहीं जोड़ा जा सकता है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे हुए शख्स को यह देखना चाहिए कि वो क्या बोल रहा है। टिप्पणियों के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसा बोलिए जो भगवान को ठीक लगे।

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