Karnataka BJP: कर्नाटक चुनावों के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इस चुनाव में भगवा पार्टी ने दक्षिण भारत का एकमात्र किला गंवा दिया। कांग्रेस ने उसे जबरदस्त हार मिली। 224 सीटों में से 135 पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। बीजेपी 66 सीटों पर ही सिमट गई। बात सिर्फ विधानसभा चुनाव नतीजे की नहीं है, अगर यही रुझान जारी रहा तो लोकसभा में भी बीजेपी को बड़ा नुकसान होगा।
BJP के लिए खतरे की घंटी
28 में से 21 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस थी आगे
नतीजों के अनुसार, राज्य की 28 लोकसभा सीटों में से 21 पर बढ़त बनाकर कांग्रेस अपने प्रतिद्वंद्वियों से बहुत आगे रही। इसका वोट शेयर भी 2018 के मुकाबले 38.1% से बढ़कर इस बार 42.8% हो गया है। इसके विपरीत भाजपा ने केवल चार लोकसभा सीटों पर बढ़त दर्ज की। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने दो सीटों पर समान ताकत दिखाई, जबकि जेडी (एस) केवल हासन सीट पर आगे थी।
कांग्रेस लोकसभा चुनाव तक अपनी जीत की लय जारी रहने की उम्मीद कर रही है। वहीं, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 2024 के चुनावों में पार्टी द्वारा यही प्रदर्शन दोहराना जरूरी नहीं है। मतदाता अक्सर विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अल-अलग तरीके से वोट करते हैं। हालांकि, मौजूदा चुनाव परिणाम निस्संदेह कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी घटना है। कांग्रेस ने 2019 के संसदीय चुनावों में राज्य में सिर्फ एक लोकसभा सीट बैंगलोर ग्रामीण जीती थी।
कांग्रेस को मिला बूस्टर डोज कांग्रेस पदाधिकारी सलीम अहमद ने कहा कि विधानसभा चुनावों ने हमें लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए बूस्टर डोज दिया है। हालांकि, रिकॉर्ड और वोटिंग पैटर्न दिखाते हैं कि कर्नाटक में मतदाता पारंपरिक रूप से राज्य और राष्ट्रीय चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को चुनते हैं। 2018 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 36% वोट शेयर के साथ 104 सीटें जीती थीं और बहुमत हासिल करने में विफल रही थी। लेकिन अगले साल 2019 में हुए संसदीय चुनावों में 54% वोट शेयर के साथ 25 लोकसभा सीटें जीतकर कांग्रेस को झटका दिया था।
