जज की भूमिका लोगों को खुश करने की नहीं, हिजाब पर फैसले के बाद चर्चा में जस्टिस हेमंत गुप्ता

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 15, 2022, 07:56 AM IST

जस्टिस हेमंत गुप्ता दो जजों की बेंच का हिस्सा थे जिसने हिजाब पर बंटी हुई राय दी थी। अपने विदाई समारोह में कहा कि उन्होंने संविधानिक व्यवस्था के तहत फैसले किए और किसी तरह का पछतावा नहीं है।

कर्नाटक हिजाब मामले में सुप्रीम कोर्ट का दो जजों जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने बंटा हुआ फैसला दिया था। जस्टिस सुधांशु धूलिया का मानना था कि हिजाब पहनना च्वाइस का मुद्दा है और इस तरह से कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से असहमति जताई। लेकिन जस्टिस हेमंत गुप्ता का कहना है कि इस मुद्दे पर फैसले के वक्त उनके सामने 11 सवालों ने दस्तक दी जिसे बड़े परिप्रेक्ष्य में समझने की जरूरत है। उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सही माना। हालांकि राय अलग होने की वजह से दोनों जजों ने इस केस को बड़ी बेंच के हवाले करने का भी फैसला लिया। इन सबके बीच हेमंत गुप्ता ने कहा कि एक जज की भूमिका लोगों को खुश करने की नहीं बल्कि कानून,अनुच्छेदों की व्याख्या की होती है।

hemant gupta

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस हेमंत गुप्ता

लोगों को खुश करना जज का काम नहीं

End of Feed