Joshimath land subsidence : अपना घर-बार छोड़कर दूसरी जगह विस्थापित होना क्या होता है, इसका दर्द जोशीमठ के लोगों में देखा जा सकता है। अपनी भरी-पूरी गृहस्थी छोड़कर लोग दूसरी सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। अपनी जड़ से दूर होना उन्हें काफी तकलीफ देने वाला है। दिल को झकझोर देने वाला और भावुक कर देने वाले दृश्य जोशीमठ के मनोहर बाग से आए हैं। यहां लोग घरों का थोड़ा-बहुत समान अपने साथ लेकर जा रहे हैं। अपना आशियान छूटने पर उनका दिल भारी है और वे रो रहे हैं। महिलाएं अपनी पीठ पर सिलेंडर लादकर अपने घरों को छोड़ रही हैं। पुरुषों के हाथों में गृहस्थी के कुछ सामान हैं।
'मेरा मायका छूट रहा, कब लौटूंगी पता नहीं'
सभी की आंखों में दर्द एवं पीड़ा झलक रही है। एक महिला ने रोते हुए कहा कि उसका मायका छूट रहा है, उसे पता नहीं कि वह दोबारा यहां कब आएगी। महिलाएं रोते हुए गले मिलकर एक-दूसरे को विदा कर रही हैं। एक महिला ने कहा कि उसे पता नहीं कि वह दोबारा यहां कब आएगी। लोगों का सामान रास्ते पर है। लोग कहीं किराए के मकान तो कहीं रिश्तेदारों के घर शरण ले रहे हैं। इमारतों एवं घरों में दरार के बाद प्रशासन लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रहा है। विस्थापित होने वाले लोगों के लिए उत्तराखंड सरकार ने अस्थायी व्यवस्था की है। फिर भी, लोगों के मन में डर है कि वे दोबारा अपने घर लौट पाएंगे कि नहीं।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
