अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि एसआईटी (SIT) की जांच का मुख्य मकसद केवल छोटे-मोटे चोरों को पकड़ना रहा, जबकि उन बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश की जा रही है जिनकी देखरेख में यह सब हुआ।
राम मंदिर दान चोरी मामला
जयराम रमेश का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज में 105 बार चोरी की घटनाएं कैद हुईं, लेकिन पुलिस ने जांच को इतनी जल्दबाजी में बंद क्यों कर दिया? उन्होंने सवाल उठाया कि जब चोरी का वीडियो 4 जून को ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास पहुंच गया था और 5 जून को सीसीटीवी देखा जा चुका था, तो एफआईआर दर्ज कराने में 25 जून तक यानी पूरे 21 दिनों का समय क्यों लगा? इस 21 दिन की देरी के पीछे का सच देश के सामने आना चाहिए।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: संसदीय समितियों में बड़ा फेरबदल, राहुल गांधी, थरूर और सुधांशु त्रिवेदी को अहम जिम्मेदारी; जानें 24 कमेटियों में किसे क्या मिला
चंपत राय और अनिल मिश्रा को सिर्फ क्यों बनाया गया गवाह?
कांग्रेस नेता ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि इतनी बड़ी तादाद में हुई चोरी बिना किसी बड़े संरक्षण के संभव नहीं हो सकती। इसके बावजूद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों- चंपत राय और अनिल मिश्रा को इस मामले में आरोपी बनाने के बजाय केवल गवाह क्यों बनाया गया है?
105 बार हुई चोरी में कुल कितनी राशि?
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, सीसीटीवी और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर आठ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और करीब 79.85 लाख रुपये बरामद हुए हैं। लेकिन जयराम रमेश का सवाल है कि 105 बार हुई चोरी में कुल कितनी राशि चुराई गई, इसका सही आंकड़ा अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस ने शुरू से ही इस संवेदनशील और आस्था से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार विपक्ष पर तो जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करती है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था के साथ हुए इस खिलवाड़ पर जवाब देने से बच रही है।
