Amritpal Singh : खालिस्तान समर्थक और असम की जेल में बंद अमृतपाल सिंह कोर्ट पहुंचा है। पंजाब हाई कोर्ट में दायर अपनी अर्जी में उसने संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति मांगी है। अमृतपाल को लगता है कि यदि वह संसद के सत्र में शामिल नहीं हुआ तो उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है। चूंकि संविधान के अनुच्छेद 104 में प्रावधान है कि लोकसभा या राज्यसभा का यदि कोई सदस्य बिना अनुमति संसद से 60 दिनों से ज्यादा समय तक अनुपस्थित रहता है तो सदन उसकी सीट को रिक्त घोषित कर सकता है।
डिब्रूगढ़ जेल में बंद है अमृतपाल सिंह।
संसद की कार्यवाही में अब तक नहीं हुआ शामिल
2024 के लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह पंजाब के खरदूर साहिब सीट से विजयी हुआ है लेकिन वह संसद की कार्यवाही में अब तक शामिल नहीं हुआ है। इस तरह से 46 दिन बीत चुके हैं। इस प्रावधान को देखें तो अब 14 दिन बचे हैं। इस अवधि में भी यदि वह संसद नहीं पहुचता है तो उसकी सीट रिक्त घोषित की जा सकती है। अपनी याचिका में अमृतपाल ने दलील दी है कि लोकसभा के महासचिव की ओर से जारी समन के मुताबिक उनकी उपस्थिति आवश्यक है और कहा कि उनकी अनुपस्थिति उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में बंद है
अमृतपाल का आरोप है उसे जानबूझकर संसद की कार्यवाही में भाग लेने से रोका जा रहा है, ताकि उनके निर्वाचन क्षेत्र खडूर साहिब को बिना प्रतिनिधित्व के छोड़ दिया जाए और अंत में उनकी सीट खाली घोषित कर दी जाए। बता दें कि अमृतपाल सिंह इस समय असम के डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में है। उसके पिता तरसेम सिंह ने कुछ महीने पहले ही नई पार्टी का ऐलान किया था, जिसका प्रमुख अमृतपाल सिंह को बनाया गया है। पार्टी का नाम 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' रखा गया है। इससे पहले अमृतपाल सिंह 'वारिस पंजाब दे' नाम से संगठन चला रहा था। अमृतपाल पर देश विरोधी गतिविधियां और खालिस्तान को बढ़ावा देने का आरोप है।
