इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। IYC की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 1 अक्टूबर 2026 के आदेश के जरिए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। चिब ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
दिल्ली हाई कोर्ट।
याचिका IYC लीगल डिपार्टमेंट के नेशनल चेयरमैन एडवोकेट रूपेश सिंह भदौरिया के जरिए दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि पुलिस को शांतिपूर्ण सभा को नियंत्रित करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार को प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने की शक्ति में नहीं बदला जा सकता। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a) और 19(1)(b) का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी प्रदर्शन को रोकने से पहले परिस्थितियों का व्यक्तिगत और अनुपातिक आकलन किया जाना चाहिए।
IYC के मुताबिक, संगठन ने 25 सितंबर को जंतर-मंतर पर करीब 100 से 150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आवेदन किया था और सुरक्षा, यातायात, अनुशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी सभी वैध शर्तों का पालन करने की बात कही थी। संगठन का दावा है कि कई बार फॉलो-अप करने के बावजूद पुलिस ने अनुमति खारिज करने की जानकारी 1 अक्टूबर, यानी प्रस्तावित कार्यक्रम की पहली तारीख को दी।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी हवाला दिया गया है, जिनमें शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति के अधिकार को मान्यता दी गई है और प्रतिबंधों को परिस्थितियों के अनुरूप तथा अनुपातिक रखने पर जोर दिया गया है। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शनों को लेकर हाल में पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के अन्य मामले भी हाई कोर्ट के सामने आए हैं।
IYC का कहना है कि यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित था। संगठन चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहता था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके खिलाफ अब हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
