देश की सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में स्नैक्स वाली ट्रे (खाने वाली ट्रे/'टेबल') को सीट के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। रेलवे के एक अधिकारी ने जब इससे जुड़ा फोटो शेयर किया और दावा किया कि ट्रेनों में इन ट्रे के टूटने या खराब होने के पीछे यह भी एक अहम कारण है, तब सोशल मीडिया पर एक धड़ा उन्हें इस बाबत घेरने लगा। लोग बोले कि यह काम जनता भी कर सकती है। अगर आम लोग तस्वीरें साझा करने लगे तब रेलवे की खराब व्यवस्था और सेवा पर आप लोग जवाब नहीं देंगे।
Vande Bharat Express Train Latest Update: रेलवे अधिकारी ने यह फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया तो कई लोग उन पर नाराज हो गए।
22 नवंबर, 2023 को फोटो पोस्ट करते हुए उन्होंने एक्स (पहले टि्वटर) हैंडल पर पोस्ट किया था- वंदे भारत एक्सप्रेस और बाकी ट्रेनों में स्नैक्स वाली ट्रे के टूटने या फिर डिफेक्टिव (गड़बड़) स्नैक ट्रे होने के प्रमुख कारणों में से एक यह भी है! फोटो वाले इस सबूत के बाद भी कानाफूसी करने वाले लोग कहेंगे कि मैं सारा दोष सिर्फ मुसाफिरों पर मढ़ रहा हूं!
रूपनगुड़ी के पोस्ट के बाद यूजर्स ने भी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। @varunkrish नाम के हैंडल से कहा गया- खैर, मैं कहूंगा कि इन टेबल ट्रे को वंदे भारत के अगले संस्करण में बेबी सीटों की तरह काम करने के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए। @Ananth_IRAS की ओर से इस यूजर को जवाब दिया गया कि ऐसा फ्लाइट में किए जाने के लिए गुजारिश करें। स्नैक ट्रे एक स्नैक ट्रे है और इसे वहीं रखा जाना चाहिए। डिज़ाइन पर अंतहीन चर्चा हो सकती है, लेकिन हर चीज़ की लागत निहितार्थ होती है और प्रत्येक 16-कोच वाली ट्रेन में 1000 ऐसी सीटें होती हैं।
@selvaoceanic नाम के अकाउंट से कहा गया कि जनता अधिक संख्या में फोटोग्राफिक साक्ष्य भी साझा कर सकती है, जो कि भारतीय रेलवे की खराब सेवा को दर्शाते हैं...आप उन मुद्दों का जवाब नहीं देंगे। @MonishR ने कमेंट किया, "हमारी नौकरशाही और हमारे राजनेताओं की समस्या दोषारोपण के बारे में बात करना है। यह निश्चित रूप से समाधान नहीं है।" हालांकि, अनंत ने इस पर जवाब दिया- नागरिकों के साथ समस्या यह है कि वे राजनेताओं और नौकरशाहों में गलतियां निकालते हैं और कभी भी अपने भीतर झांककर नहीं देखते कि वे कितने गैर-जिम्मेदार हैं।
रूपनगुड़ी, भारतीय रेलवे में ब्यूरोक्रेट हैं। मौजूदा समय में वह दक्षिण भारतीय सूबे तमिलनाडु के चेन्नई में रेलवे में एडीआरएम हैं। 1990 में ऋषि वैली और फिर 1993 में फर्ग्युसन कॉलेज से पढ़े अनंत 1997 बैच के आईआरएएस हैं। उन्हें घूमने के अलावा स्पोर्ट्स और खाने-पीने में दिलचस्पी है।
