Indigo विवाद के बीच ट्रेन ड्राइवरों ने बयां किया दर्द, पायलटों की तरह काम के घंटे तय करने की मांग

भारतीय रेलवे के लोको पायलट (ड्राइवर) अपनी ड्यूटी के घंटों को सीमित करने के मुद्दे को हवा दे दी हैं। ट्रेन चालक थकान से बचने और रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए काम के घंटों में रियायत और सीमित कार्य अवधि की मांग की है। यह मांग इंडिगो में हुए संकट के बाद एयरलाइन पायलटों के लिए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए की है।

इंडिगो संकट के बीच भारतीय रेलवे के लोको पायलटों ने भी अपने हक की बात रखी है। वर्षों से लगातार काम और थकान कम करने और रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्यूटी के घंटों की सीमा तय करने की मांग उठाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) ने लोको पायलटों के लिए एयरलाइन पायलटों के समान मानदंड लागू करने की मांग की है। इनमें यात्री (कोचिंग) ट्रेनों के लिए ड्यूटी के 6 घंटे और मालगाड़ियों के लिए 8 घंटे, 16 घंटे की ट्रिप रेस्ट और 30 घंटे का विश्राम शामिल है। साथ ही रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार महिला कर्मचारियों के लिए उचित सुविधाएं प्रदान करना शामिल है।

Loco pilots Duty Hours Dimand

लोकों पायलटों ने काम के घंटे तय करने की रखी डिमांड

लोकों पायलटों का यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब इंडिगो बड़े व्यवधानों में से एक से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) मानदंड हैं, जिसके कारण देशभर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंसे हुए हैं।

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