Pralay Missiles: भारतीय सशस्त्र बल उत्तरी सीमाओं से खतरे का मुकाबला करने के लिए एक शक्तिशाली रॉकेट फोर्स बनाने की दिशा में अहम कदम उठा रहा है। ऐसे ही महत्वपूर्ण कदम के तहत 7,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से दो और प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए ऑर्डर दिए जा रहे हैं। दिसंबर 2022 में रक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए इन मिसाइलों की एक इकाई को मंजूरी देने के बाद यह कदम उठाया गया।
भारतीय सेना को मिलेंगे 250 प्रलय मिसाइलें
एएनआई ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि रक्षा बलों के लिए प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की दो और इकाइयां अधिग्रहित की जा रही हैं, जो तीनों सेनाओं के लिए एक रॉकेट फोर्स बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। भारतीय सेना के लिए इन प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों के अधिग्रहण का प्रस्ताव एक उन्नत चरण में है और जल्द ही इसे मंजूरी मिल सकती है।
जानिए इसकी खासियतें
- प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज 150 किमी से 500 किमी है और यह दुश्मन की इंटरसेप्टर मिसाइलों का इससे निपट पाना आसान नहीं होता।
- रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा बनाई गई प्रलय मिसाइल अभी भी विकसित की जा रही है। प्रलय मिसाइल प्रणाली का विकास लगभग 2015 में शुरू हुआ और दिवंगत जनरल बिपिन रावत ने इसे बढ़ावा दिया था।
- रॉकेट के पिछले साल अलग-अलग दिनों 21 और 22 दिसंबर 2021 को दो सफल परीक्षण हुए थे।
- प्रलय एक अर्ध-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है और यह इंटरसेप्टर मिसाइलों के लिए एक चुनौती है।
- यह बीच हवा में एक निश्चित दूरी तक उड़ान भरने के बाद अपने मार्ग को बदलने की क्षमता रखती है।
- मिसाइल गाइडेंस प्रणाली में एवियोनिक्स और अत्याधुनिक नेविगेशन एकीकृत है। पहले भारतीय वायु सेना इस मिसाइल को हासिल करेगी और फिर इसे भारतीय सेना को दिया जाएगा।
भारतीय सशस्त्र बलों को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए प्रलय मिसाइल रेंज की सीमा को कुछ सौ किलोमीटर तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। चूंकि चीन और पाकिस्तान दोनों के पास सामरिक उद्देश्यों के लिए बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, इसलिए प्रलय से भारतीय सशस्त्र बलों को महत्वपूर्ण बढ़त मिलने की उम्मीद है।
