POK के बारे में कितना जानते हैं आप, जानें किस हिस्से को लाने के लिए भारतीय सेना है तैयार

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 23, 2022, 06:09 PM IST

India Army is Ready For POK Occupation: 22 फरवरी, 1994 को भारतीय संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव में पीओके सहित पूरे जम्मू और कश्मीर को भारत का हिस्सा बताया गया था। प्रस्ताव में कहा गया है कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। भारत अपने इस भाग के विलय का हरसंभव प्रयास करेगा।

KEY HIGHLIGHTS
  • मूल जम्मू और कश्मीर में 2,22,236 वर्ग किमी क्षेत्र शामिल था।
  • पाकिस्तान के कब्जे में 72,935 वर्ग किमी हैं। इसके अलावा उसने करीब 5 हजार वर्ग किमी क्षेत्र चीन को दे दिया है।
  • लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना पीओके पर कब्जा करने के लिए तैयार है।

India Army is Ready For POK Occupation: भारतीय सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बीते मंगलवार को बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय सेना पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को वापस लेने के लिए तैयार है। और इसके लिए वह भारत सरकार के आदेश का इंतजार कर रही है। इसके पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिमाचल प्रदेश में एक चुनावी सभा में कहा था कि हम पीओके में कश्मीरियों के दर्द को महसूस करते हैं। हमने कश्मीर का विकास शुरू कर दिया है और हम गिलगित और बाल्टिस्तान पहुंचने तक नहीं रुकेंगे। रक्षा मंत्री और सेना के वरिष्ठ अधिकारी के बयान से साफ है कि सरकार और सेना के स्तर पर इस बात पर पूरी तैयारी है कि वक्त आने पर पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में वापस शामिल कर लिया जाय।

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फाइल फोटो: POK के वापस लेने के लिए क्या है तैयारी

संसद पारित कर चुकी है प्रस्ताव

लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि पीओके के विषय पर संसद में प्रस्ताव पारित हो चुका है, इसमें कुछ भी नया नहीं है। यह संसद के प्रस्ताव का हिस्सा है। सेना, सरकार का हर आदेश को मानने के लिए तैयार है। लेफ्टिनेंट जनरल जिस प्रस्ताव के पारित होने की बात कर रहे हैं, वह 22 फरवरी, 1994 को भारतीय संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव है। जिसमें पीओके सहित पूरे जम्मू और कश्मीर को भारत का हिस्सा बताया गया। प्रस्ताव में कहा गया है कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। भारत अपने इस भाग के विलय का हरसंभव प्रयास करेगा।

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