Indian Air Force Fighter Jet: भारतीय वायु सेना की टॉप लीडरशिप तेजस MkII प्रोग्राम (Tejas MkII programme) पर पूरा भरोसा जता रही है। इसे एक जरूरी फोर्स मल्टीप्लायर मान रही है जो राफेल फ्लीट और भारत के भविष्य के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर, AMCA, दोनों को कॉम्प्लिमेंट करेगा। सीनियर IAF प्लानर्स इस एयरक्राफ्ट को एक आदर्श 'विंगमैन' प्लेटफॉर्म के तौर पर देख रहे हैं जो भारी और ज्यादा महंगे फाइटर जेट्स के साथ काम कर सकता है, जिससे लागत को कंट्रोल में रखते हुए कॉम्बैट क्षमता बढ़ेगी।
इंडियन एयरफोर्स को इस 'मिनी राफेल' पर पूरा भरोसा
राफेल जैसी क्षमता
मौजूदा एयर चीफ मार्शल, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने वायु सेना के भविष्य के फोर्स स्ट्रक्चर में तेजस MkII के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि छोटा एयरक्राफ्ट होने के बावजूद, तेजस MkII एवियोनिक्स और ऑनबोर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स के मामले में राफेल के बराबर होगा। हालांकि राफेल एक बड़ा प्लेटफॉर्म है जिसकी कुल पेलोड क्षमता ज्यादा है। लेकिन IAF लीडरशिप का मानना है कि तेजस MkII भी उसी क्लास के हथियार और सेंसर ले जा पाएगा, जिससे यह कई मिशन प्रोफाइल में समान कॉम्बैट प्रभाव दे सकेगा।
'मिनी राफेल'
एवियोनिक्स क्षमता में यह समानता उन मुख्य कारणों में से एक है जिसकी वजह से डिफेंस हलकों में तेजस MkII को अनौपचारिक रूप से 'मिनी राफेल' कहा जा रहा है। एयरक्राफ्ट के लिए प्लान किए गए एडवांस्ड रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताओं से मीडियम-वेट और भारी मल्टीरोल फाइटर जेट्स के बीच क्वालिटी का अंतर कम होने की उम्मीद है। ऑपरेशनल शब्दों में, यह मिक्स्ड फॉर्मेशन की अनुमति देगा जहां राफेल प्राइमरी स्ट्राइक या कमांड नोड्स के रूप में काम करेंगे, जिन्हें तेजस MkII एयरक्राफ्ट एस्कॉर्ट, सप्रेशन या अतिरिक्त स्ट्राइक भूमिकाओं में सपोर्ट करेंगे।
IAF तेजस MkII को एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानती है। इसे एक अकेले प्लेटफॉर्म के रूप में मानने के बजाय, वायु सेना MkII को उन टेक्नोलॉजी का एकीकरण मानती है जो सीधे AMCA डेवलपमेंट में काम आएंगी। फ्लाइट कंट्रोल नियम, एडवांस्ड कंपोजिट, हाई-एंड एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और हथियार इंटीग्रेशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को MkII पर विकसित किया जा रहा है ताकि पांचवीं पीढ़ी के फाइटर के लिए टेक्नोलॉजिकल जोखिम को कम किया जा सके।
एक नजरिए से तेजस MkII IAF के ऑपरेशन के विकसित हो रहे कॉन्सेप्ट में अच्छी तरह फिट बैठता है, जहां पायलट वाले फाइटर जेट अकेले प्लेटफॉर्म के बजाय कोऑर्डिनेटेड पैकेज में काम करते हैं। राफेल और AMCA दोनों के विंगमैन के तौर पर, MkII से सेंसर की पहुंच बढ़ाने, अतिरिक्त हथियार ले जाने और ऑपरेशनल लोड को संभालने की उम्मीद है, जिससे हाई-वैल्यू एसेट्स की उपलब्धता और जीवित रहने की क्षमता बनी रहेगी।
