SC ने नहीं मिली राहत तो राजनीतिक 'दूल्हा' नहीं बन पाएंगे राहुल, इतने वर्ष करना होगा इंतजार

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Jul 7, 2023, 12:58 PM IST

Rahul Gandhi News: क्या राहुल गांधी की राजनीति पर मोदी सरनेम मानहानि केस पूरी तरह ग्रहण लगा देगा। यह बड़ा सवाल है। गुजरात हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब उनकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर होगी। अगर सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलती है तो वो सजा भुगतने के 6 साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

Rahul Gandhi News: 2019 में कर्नाटक के कोलार में चुनावी प्रचार में कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि सारे मोदी सरनेम (Modi surname defamation case) वाले चोर क्यों होते हैं। उनके इस बयान के बाद सूरत वेस्ट के बीजेपी विधायक ने केस दर्ज कराया। निचली अदालत में करीब चार साल कर मुकदमा चला। दोनों पक्षों की तरफ से तर्क पेश किए गए। हालांकि उस लड़ाई में राहुल गांधी की हार हुई। अदालत ने दोषी माना और 2 साल की सजा सुना दी। उसका असर यह हुआ कि केरल के वायनाड से सांसद राहुल गांधी की सदस्यता चली गई। लेकिन उनके पास बचाव के लिए कानूनी विकल्प मौजूद थे और उन्होंने सजा पर रोक लगाने के लिए गुजरात हाईकोर्ट की तरफ रुख किया। गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat highcourt) ने शुक्रवार यानी 7 जुलाई को जो फैसला सुनाया वो राहुल गांधी और कांग्रेस (congress) दोनों के लिए दुखदायी थी। हाईकोर्ट ने भी उन्हें दोषी मानते हुए सजा को बरकरार रखा। अब राहुल गांधी के सामने सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है।

Rahul gandhi, Narendra Modi,

मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी को गुजरात हाईकोर्ट से भी राहत नहीं

तो 2034 तक करना होगा इंतजार

अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला खिलाफ जाता है तो राहुल गांधी को फैसले के दिन से दो साल तक सजा भुगतनी होगी। अब मान लें 2023 में ही सुप्रीम कोर्ट से निर्णायक फैसला आता है तो दो साल की सजा 2025 में पूरी होगी और उसके बाद 6 साल तक वो चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यानी कि 2031 तक एक्टिव राजनीति पर विराम लग जाएगा। सामान्य परिस्थिति में 2024, 2029 के बाद 2034 में चुनाव होगा। यानी कि राहुल गांधी को सामान्य तौर पर 11 वर्ष का इंतजार करना होगा। राजनीति में जहां हर एक पल का अपना महत्व होता है वहां 11 साल का इंतजार कितना मायने रखेगा उसे समझा जा सकता है। हालांकि यह स्थिति तब बनेगी जब वो राहत नहीं पाएंगे। लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि विपक्षी एकता किस तरह प्रभावित होगी।

End of Feed