Special Intensive Revision : बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण कराने वाली चुनाव आयोग की पहल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई शुरू की। चुनाव आयोग की ओर से कोर्ट में पेश पूर्व अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने इन याचिकाओं पर आपत्ति जताई। उन्होंने कोर्ट से चुनाव आयोग का पक्ष सुनने की अपील की। उनकी इस मांग पर शीर्ष अदालत तैयार हुआ। याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि कानून में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का प्रावधान है। यह संक्षिप्त भी हो सकता है और पूरी सूची को नए सिरे से भी बनाया जा सकता है।
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर विवाद। तस्वीर-पीटीआई
SIR को बिहार चुनाव से क्यों जोड़ रहे-SC
उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों से क्यों जोड़ा जा रहा है, यह प्रक्रिया चुनावों से अलग क्यों नहीं की जा सकती? विशेष गहन पुनरीक्षण की कवायद महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो लोकतंत्र की जड़ से जुड़ा है, यह मतदान के अधिकार से संबंधित है। कोर्ट के इस सवाल पर ईसी ने कहा कि किसी को भी अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने पूछा कि अगर चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में संशोधन का अधिकार नहीं है तो फिर यह कौन करेगा? समय के साथ-साथ मतदाता सूची में नामों को शामिल करने या हटाने के लिए उनका पुनरीक्षण आवश्यक होता है।
नागरिकता गृह मंत्रालय का विषय-कोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से तीन मुद्दों पर जवाब मांगा-क्या उसके पास मतदाता सूची में संशोधन करने, अपनायी गयी प्रक्रिया और कब यह पुनरीक्षण किया जा सकता है, उसका अधिकार है? शीर्ष अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि आपको बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत नागरिकता की जांच करनी है, तो आपको पहले ही कदम उठाना चाहिए था, अब थोड़ी देर हो चुकी है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में नागरिकता के मुद्दे को क्यों उठाया जा रहा है, यह गृह मंत्रालय का अधिकार क्षेत्र है। कोर्ट ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में दस्तावेजों की सूची में आधार कार्ड पर विचार न करने को लेकर निर्वाचन आयोग से सवाल किया।
SC ने पूछा-SIR का काम इतनी देरी से क्यों?
उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग से पूछा कि उसने बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम इतनी देरी से क्यों शुरू किया। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर कराने में कोई त्रुटि नहीं है लेकिन इसकी प्रक्रिया चुनाव की शुरुआत होने से कई महीने पहले शुरू हो जानी चाहिए थी।
आधार भी स्वीकार नहीं कर रहा ईसीआई-याचिकाकर्ताओं के वकील
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि बिहार में चुनाव होने में कुछ महीने बचे हैं और ईसीआई का कहना है कि वह 30 दिनों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण करेगा। ईसीआई का यह भी कहना है कि वह आधार स्वीकार नहीं करेगा। यहां तक कि लोगों से उनके माता-पिता के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह पूरी तरह से 'मनमाना एवं भेदभाव' करने वाला है।
अब देखते हैं कोर्ट क्या फैसला करता है-तेजस्वी
सुप्रीम कोर्ट में बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, 'हमने कोर्ट का रुख किया है और अपना पक्ष रखा है। अब देखते हैं कोर्ट क्या फैसला करता है... सबसे बड़ा सवाल यह है कि आधार कार्ड, राशन कार्ड, जॉब कार्ड, मनरेगा कार्ड को क्यों खारिज किया जा रहा है? बिहार के लोगों के पास आज भी दस्तावेज़ नहीं हैं। चुनाव आयोग कोई स्पष्टता नहीं दे रहा है। आयोग के आयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सब कुछ साफ क्यों नहीं करते? वे भ्रम क्यों फैला रहे हैं? चुनाव आयोग को इतनी अहमियत क्यों है? ऐसा लग रहा है जैसे चुनाव आयोग बीजेपी की पार्टी सेल की तरह काम कर रहा है।'
