अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मुलाकातों को लेकर भारत में सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP (SP) के नेताओं ने पुरी के साथ एपस्टीन की तस्वीरें साझा करते हुए उनकी मुलाकातों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने पूछा है कि पुरी एपस्टीन से क्यों मिले थे और इन मुलाकातों का मकसद क्या था।
विपक्ष का निशाना पुरी के उस पुराने बयान पर भी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एपस्टीन से उनकी मुलाकातें निजी तौर पर नहीं, बल्कि एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं। हालांकि, पुरी ने पहले स्पष्ट किया था कि एपस्टीन के साथ उनकी बातचीत पेशेवर थी और उसका उसके आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं था।
सुप्रिया श्रीनेत और महुआ मोइत्रा ने साधा निशाना
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पुरी के इस दावे पर सवाल उठाया कि उन्होंने एपस्टीन से कभी अकेले में मुलाकात नहीं की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तरह के लोगों को पसंद करते हैं और अपने आसपास रखते हैं। श्रीनेत ने इस मुद्दे को महिलाओं के प्रति दक्षिणपंथी विचारधारा के रवैये से भी जोड़कर टिप्पणी की।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पुरी के पुराने वीडियो बयान को साझा करते हुए उन पर तंज कसा। पुरी ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने एपस्टीन से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात की थी और ये मुलाकातें एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं।
मोइत्रा ने तस्वीरों का हवाला देते हुए सवाल किया कि अगर ये बैठकें प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई थीं, तो तस्वीरों में बाकी प्रतिनिधि कहां थे। उनकी टिप्पणी का मकसद पुरी के उस दावे पर सवाल उठाना था, जिसमें उन्होंने मुलाकातों को पेशेवर और प्रतिनिधिमंडल से जुड़ा बताया था।
NCP (SP) ने मुलाकातों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की
NCP (SP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने तस्वीरों को गंभीर बताते हुए पुरी से यह स्पष्ट करने की मांग की कि उन्होंने एपस्टीन से मुलाकात क्यों की थी? उन्होंने कहा कि पुरी को यह बताना चाहिए कि राजनयिक की हैसियत से हुई मुलाकातों का उद्देश्य क्या था?
गावंडे ने आशंका जताई कि सरकार इन मुलाकातों को राजनयिक जरूरत के रूप में पेश कर सकती है। उन्होंने कहा कि मुलाकातों की शर्तों और उनमें हुई बातचीत का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि पुरी को एपस्टीन से जुड़े गंभीर अपराधों की जानकारी नहीं रही होगी और उनसे इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने का आग्रह किया।
संजय राउत ने पूछा- किसका संदेश लेकर मिले थे पुरी?
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भी हरदीप सिंह पुरी और एपस्टीन की तस्वीर साझा करते हुए मुलाकात के उद्देश्य पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए पूछा कि पुरी एपस्टीन से किसका संदेश लेकर मिले थे।
पत्रकारों से बातचीत में राउत ने कहा कि एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक होने के बाद पुरी के पुराने बयान और सामने आई तस्वीरों पर चर्चा हो रही है। उन्होंने दावा किया कि तस्वीरों में दोनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं और सवाल किया कि इन मुलाकातों के पीछे क्या वजह थी।
राउत ने यह भी कहा कि यह मामला आगे और चर्चा में आ सकता है। हालांकि, विपक्षी नेताओं के इन सवालों और आरोपों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि पुरी को एपस्टीन के अपराधों की जानकारी थी या वह किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल थे।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने भी कथित तस्वीर साझा करते हुए पुरी के पुराने बयान पर सवाल किया कि क्या उन्होंने पहले यह नहीं कहा था कि एपस्टीन के साथ उनकी कोई निजी मुलाकात नहीं हुई थी।
हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन से मुलाकात पर क्या कहा था?
फरवरी में हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन से अपनी मुलाकातों को लेकर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि वह उससे तीन या अधिकतम चार बार मिले थे। उनके मुताबिक, ये मुलाकातें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं।
पुरी ने बताया था कि ये बैठकें संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत पद से इस्तीफा देने के बाद और 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले हुई थीं। उन्होंने यह भी कहा था कि IPI में उनके वरिष्ठ अधिकारी टेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे और इसी वजह से प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी मुलाकातें हुईं।
पुरी ने इन बातचीत को पेशेवर बताते हुए एपस्टीन के आपराधिक आरोपों से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था।
क्या है पूरा विवाद?
इस मामले में विवाद का मुख्य केंद्र एपस्टीन के साथ पुरी की मुलाकातों की प्रकृति, उनकी संख्या और उद्देश्य है। विपक्षी नेता तस्वीरों को आधार बनाकर उनके पुराने बयान पर सवाल उठा रहे हैं और बातचीत का विवरण सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, पुरी का पहले दिया गया पक्ष है कि मुलाकातें पेशेवर थीं और प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं।
