Future War: भविष्य की जंग में लड़ाई किसी एक मोर्चे पर नहीं होगी। जमीन पर सैनिकों की कार्रवाई के साथ हवा में निगरानी, समुद्र में सैन्य गतिविधियां, साइबर क्षेत्र में डिजिटल संघर्ष और अंतरिक्ष से मिलने वाली जानकारी एक ही समय में निर्णायक हो सकती है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने एक कार्यक्रम में इन सभी क्षेत्रों को एकीकृत तरीके से देखने की जरूरत बताई। सीडीएस ने कहा कि युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है और पारंपरिक सैन्य क्षेत्रों के साथ साइबर तथा अंतरिक्ष की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में थल, वायु और नौसेना को अलग-अलग क्षमताओं के रूप में देखने के बजाय एक साझा सैन्य शक्ति के रूप में विकसित करना होगा।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि।
'सैन्य प्रतिक्रिया के लिए सभी सूचनाओं को तेजी से जोड़ना होगा'
मान लीजिए किसी संकट के दौरान समुद्र में गतिविधियां बढ़ती हैं। उस समय हवा से मिलने वाली निगरानी, जमीन से जुटाई गई जानकारी और अंतरिक्ष आधारित संचार एक साथ काम आ सकते हैं। यदि इसी दौरान साइबर क्षेत्र में भी दबाव बनाया जाए, तो सैन्य प्रतिक्रिया के लिए सभी सूचनाओं को तेजी से जोड़ना जरूरी होगा। जनरल सुब्रमणि ने इसी कारण केवल इंटर-सर्विस समन्वय से आगे बढ़कर वास्तविक संयुक्तता पर जोर दिया। इसका मतलब यह है कि तीनों सेनाएं किसी अभियान की शुरुआत से ही एक साझा योजना और उद्देश्य के साथ काम करें।
संयुक्त ताकत तैयार करने पर रहना चाहिए जोर-CDS
उन्होंने प्लेटफॉर्म-केंद्रित सोच से आगे जाने की जरूरत भी बताई। सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि किस सेवा के पास कितने विमान, जहाज या अन्य सैन्य साधन हैं। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इन सभी क्षमताओं को जोड़कर किस तरह की संयुक्त ताकत तैयार की जा सकती है। नई तकनीक इस बदलाव को और जरूरी बनाती है। ड्रोन और AI जैसी प्रणालियां बड़ी मात्रा में जानकारी उपलब्ध करा सकती हैं। लेकिन इसका फायदा तभी मिलेगा जब वह जानकारी सही कमांडर तक तेजी से पहुंचे और समय पर फैसला लिया जाए।
इस बात पर निर्भर करेगी भारत की रणनीतिक बढ़त
साइबर और अंतरिक्ष की क्षमताओं को भी सैन्य तैयारी के मुख्य ढांचे में शामिल करना होगा। इनके लिए तकनीकी विशेषज्ञता और लगातार निवेश की जरूरत होगी। सीडीएस ने घरेलू रक्षा क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया। स्टार्टअप, MSME, निजी उद्योग और अकादमिक संस्थान इन नई क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भविष्य की जंग इसलिए पांच अलग-अलग लड़ाइयों का जोड़ नहीं होगी। थल, जल, नभ, साइबर और स्पेस एक-दूसरे से जुड़े हुए मोर्चे होंगे। भारत की रणनीतिक बढ़त इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन सभी क्षमताओं को कितनी तेजी से एक साझा और प्रभावी सैन्य शक्ति में बदलता है।
