2018 में कमलनाथ की याचिका से राहुल गांधी की मांग तक, वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग का नया आदेश; क्या बदला?

जून 2025 में चुनाव आयोग ने इन दोनों राज्यों की 2009 से 2024 तक की मतदाता सूचियों का डेटा साझा करने का फैसला किया। राहुल गांधी ने इसे सही दिशा में पहला कदम बताया।

वोटर लिस्ट को किस डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराया जाए, इस पर बहस नई नहीं है। साल 2018 में कांग्रेस नेता कमलनाथ ने सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची को टेक्स्ट फॉर्मेट में देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि सूची की सही तरीके से जांच करने और फर्जी या दोहराए गए नामों की पहचान करने के लिए ऐसा डिजिटल फॉर्मेट जरूरी है, जिसमें नाम खोजे जा सकें। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय यह मांग स्वीकार नहीं की थी।

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चुनाव आयोग (फाइल फोटो)

करीब सात साल बाद हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों की मतदाता सूचियों को लेकर कांग्रेस ने फिर यह मुद्दा उठाया। जून 2025 में चुनाव आयोग ने इन दोनों राज्यों की 2009 से 2024 तक की मतदाता सूचियों का डेटा साझा करने का फैसला किया। राहुल गांधी ने इसे सही दिशा में पहला कदम बताया, लेकिन पूछा कि यह डेटा डिजिटल और मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में कब उपलब्ध कराया जाएगा।

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