उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के दौरान अपने कार्यकाल और यूपी पुलिस से जुड़े कई दिलचस्प किस्से हमारे साथ साझा किए। रिटायर आईपीएस विक्रम सिंह यूपी पुलिस के कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनंस का नेतृत्व कर चुके हैं, जिसमें डाकूओं के सफाए से लेकर बुलडोजर एक्शन तक शामिल है। अपनी कड़क छवि के लिए मशहूर विक्रम सिंह ने कभी डकैत फूलने देवी की गैंग का भी एनकाउंटर किया था। बाद में फूलन देवी जब राजनीति में आईं और सांसद बनीं तब भी विक्रम सिंह यूपी पुलिस में बड़े ओहदे पर थे।
यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह
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बुलडोजर एक्शन पर क्या बोले विक्रम सिंह
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने टाइम्स नेटवर्क की वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रमा सोलंकी के साथ खास बातचीत में योगी सरकार के आने से पहले बुलडोजर एक्शन पर बात करते हुए कहा, "बिना दंड के राज्य अधिकार नहीं चलता है और यहां कोई लोकप्रियता लूटने के लिए हम लोग नहीं आते हैं।
लेकिन जब लोग ये कहते हैं कि ये कालापानी अधिकारी हैं या कालापानी में जो लोग अवांछनीय तत्व हैं। उनका निस्तारण कर रहे हैं तो मैं उसको एक अलंकरण मानता हूं। जहां आवश्यकता होती है, देखिए जैसे इलाज होता है, इलाज लाल दवा भी होती है, इलाज बैंडेड भी होता है, इलाज जो होता है छोटी मोटी सर्जरी भी होती है और वो बाईपास सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट तक जा सकती है। तो जैसे होता है रोगी वैसा होता है उपचार। तो बिना किसी भेदभाव के जो व्यवसायिक दक्षता के अनुरूप प्रोफेशनल रिक्वायरमेंट्स जो होते हैं उसमें प्रवाद नहीं किया जाता है और ये भी नहीं कि किसी से कोई घृणा है, लेकिन कोई ये कह दे कि सेवा का अवसर देगा, उसको मेरा विभाग निराश करेगा, ये होने वाला नहीं है। 1861 से लेकर हमारा सेवा भाव सर्वत्र पूरे विश्व में जाना जाता है कि जिसने एक बार पुलिस की सेवा ले ली तो वो मथुरा के पेड़ों की तरह है। जिसने खाया वो भी पछताया, नहीं खाया वो भी पछताया।"
फूलन देवी के साथ एनकाउंटर
इंटरव्यू के दौरान जब पूर्व आईपीएस से डकैत और बाद में सांसद बनीं फूलन देवी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, " उस समय देखिए ऐसा था हमीरपुर में मैं एसपी था। कई बार गोली चली, जो रामायण सिंह एसओ का दौरा का जो वाक्या हुआ, वो भी फूलन देवी गैंग से ही फेस ऑफ में हुआ था। गोली चली थी। उसके बाद फूलन देवी ने मध्य प्रदेश में आत्मसमर्पण किया। सांसद बनी। तो माननीय सांसद थीं तो मैं आईजीएसटीएफ था। पुलिस महानिदेशक कार्यकर्ता था। तो अब आप देखिए क्या सामान्य शिष्टाचार हो रहा था। वो डीजीपी के यहां मिलने आई थीं। शायद डीजीपी थे नहीं। उन्होंने प्रतीक्षा की, तो मेरे कमरे में आके प्रतीक्षा की और भैया कहती थी मुझे, उन्होंने भैया आज सर में बहुत दर्द हो रहा है। कुछ दवा मंगा दो। हमने तुरंत डिस्पेंसरी से डिस्प्रिन की गोली मंगाई। दो बिस्किट मंगाए। चाय मंगाई। हमने कहा- दीजिए। आप खाइए इसको। ईश्वर की लीला तो देखिए कि कभी मैं एसएलआर से एलएमजी से और वो उस तरफ से स्वचालित हथियारों से, लेकिन आज डिस्प्रिन खा रही थी वो मेरे दफ्तर में, तो ईश्वर की क्या लीला थी, ये भी देख लीजिए। संयोग था इसमें।
अतीक अहमद के आपराधिक रिकॉर्ड पर क्या बोले विक्रम सिंह
अतीक अहमद को लेकर इस बातचीत के दौरान विक्रम सिंह ने कहा चैलेंज तो बहुत बड़ा था। आपने कहा साइकोपैथ किलर तो वो साइकोपैथ किलर था। जैसे ही मैंने डीजीपी का चार्ज लिया, 2007 में इसके भाई अतीक और अशरफ ने यतीम खाने में जाकर के कब्जा किया। बच्चियों का गैंग रेप करवाया और मदरसे पर कब्जा किया। अब सत्तारूढ़ के लोगों ने कहा कि साहब और तमाम चीजें हैं, उनकी तरफ देख लीजिए। इसकी तरफ वैसे एक्शन होता नहीं। हमारे एक बैचमेट थे, बड़े पवित्र अब स्वर्गीय हैं, सीएम भट्ट, उन्होंने कहा विक्रम तुम डीजीपी बन गए, अब तुम चाहे 24 घंटे रहो, या तुम चार साल रहो, गलत काम तो करना मत और चाहे आज हट जाओ, तब भी फॉर्मर डीजीपी रहोगे और चार साल बाद भी, लेकिन इज्जत वाला काम और सही काम करके कीर्तिमान स्थापित कर देना। मुझे वो बात एकदम से फ्लैश और अपील कर गई। नहीं कहा होता तब भी मैं करता लेकिन मेरे अंतर्मन को उससे रिइंफोर्समेंट मिला कि आज तय हो जाए विक्रम सिंह, अब ये बिलकुल डीजीपी रहें या ना रहें, ये मायने नहीं रखता है। आज इसका हिसाब होगा। फिर हमने लगवा करके इनकी कराई बहुत कायदे से, बुलडोजर चलवा करके इनकी खातिर बहुत कायदे से, मुकदमा लिख करके, अब इनको लग गया कि इन्होंने रॉन्ग नंबर डायल किया। हम एक दिन के अंदर विद इन 24 आवर्स मैसेज आता है कि इनकी बेगम मिलना चाहती हैं। हमने कहा ठीक है, सांसद की बेगम हैं, जरूर मिल सकती हैं, ऑफिस पर मैं मिला, शाहिस्ता और उनके बेटे असद, जो छोटा सा बच्चा था, मासूम बड़ा प्यारा बच्चा था, तो आई बैठे, जैसे मैं वहां बैठा हूं, यहां पर दो कुर्सी लगी। उन्होंने कहा आप वालिद या बड़े भाई की तरह हैं- मैं बेवा नहीं होना चाहती। कौन चाहेगा, मैं भी नहीं चाहूंगा। लेकिन अगर कोई वसिद है, आपको बेवा बनाने में इसका फैसला आपके शौहर करेंगे। ना मैं करूंगा ना आप करेंगी। अपने शौहर को एक आसान मशवरा दे दीजिए कि कानून अगर तोड़ेंगे तो वो भूल जाएंगे जुल्म क्या होता है? इसका फैसला आप कर लें और मैं आपको ये कह रहा हूं, अगर रास्ता बदल दिया, मेरी तरफ से आपको कोई फोन भी नहीं जाएगा और नहीं तो ये मेरा चैलेंज है, आप जाकर के कहीं, दुनिया किसी कोने में छुप जाइए, मेरा एसटीएफ का रिकॉर्ड भी देख लीजिए, आप कहीं सुरक्षित नहीं रहिएगा, ना सिंगापुर में, ना नेपाल में, ना दुबई में।"
