Delhi fake cancer drug racket busted: दिल्ली से ऐसी खबर आई है जिसे सुनने के बाद आपका सावधान होना जरूरी है। नकली दवा से जुड़ी इस खबर ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। यहां एक गिरोह ने लाचार मरीजों को मौत बांटकर लाखों के वारे-न्यारे कर लिए। दवा भी उस बीमारी की दी जिसमें मौत को मात देना किसी चमत्कार से कम नहीं होता है। धंधेबाजों ने निशाना बनाया कैंसर के मरीजों को। जिंदगी की आस लगाए बैठे मरीजों को असली शीशी में नकली दवा थमा दी। पुलिस ऑपरेशन में ये गिरोह हाथ तो आया, लेकिन तब तक ये कई जिंदगियों से खिलवाड़ कर चुका था। सिर्फ भारत ही नहीं, इन्होंने विदेशों में भी नकली दवा सप्लाई की। दिल्ली के बाहर से आने वाले मरीजों को टारगेट बनाया। खासतौर से हरियाणा, बिहार, नेपाल या फिर अफ्रीकी देशों से आने वाले मरीज इनके खास निशाने पर रहते थे। कौन है इस गिरोह का मास्टरमाइंड, किस तरह इसे अंजाम दिया जाता था, आपको सबकुछ बता रहे हैं।
मरीजों को कैंसर की नकली दवा बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़
मोतीनगर में चल रहा था नकली दवा का गोरखधंधा
दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर में डीएलएफ ग्रीन्स में बड़े पैमाने पर चल रहे नकली दवा गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के लोग नकली कैंसर और कीमोथेरेपी की दवाओं से लोगों की जिंदगियों से खेल रहे थे। यहां बडे़ पैमाने पर नकली दवाओं का निर्माण और वितरण हो रहा था। इन गिरोहबाजों का काम करने का तरीका ऐसा था कि आप भी चौंक जाएंगे। इन्होंने 100 रुपये की एंटी-फंगल दवा की खाली शीशियां भरीं और उन्हें भारत, चीन और अमेरिका में जीवनरक्षक कैंसर दवाओं के रूप में 1 से 3 लाख रुपये प्रति शीशी में बेच दिया। गिरोह का भंडाफोड़ करने के लिए पुलिस का ऑपरेशन दो साल तक चला। इस दौरान इन शातिरों ने 7,000 से अधिक ऐसे इंजेक्शन बेचे।नकली दवा गिरोह का मास्टरमाइंड विफिल जैन
दिल्ली की विशेष आयुक्त शालिनी सिंह ने बताया कि किस तरह गिरोह के सरगना ने इस काम को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि अपराध शाखा की जांच से पता चला है कि कैसे इन लोगों ने न सिर्फ दिल्ली और पड़ोसी राज्यों बल्कि बाहर के देशों के मरीजों को भी निशाना बनाया। इसका मास्टरमाइंड है बागपत का विफिल जैन है जो मोती नगर से इसे अंजाम देता था। अपना बचपन सीलमपुर में बिताने के बाद उसने 10वीं करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद सीलमपुर में एक मेडिकल स्टोर में स्टोर बॉय के रूप में काम करना शुरू कर दिया। शुरुआत में उसने थोक बाजारों से स्थानीय मेडिकल स्टोर्स को दवाओं की सप्लाई शुरू की।
नीरज चौहान संभालता था नेटवर्क
कम पढ़े लिखे विफिल जैन ने इस काम को अंजाम देने के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार किया। उसने कैंसर के मरीजों को अपना निशाना बनाया क्योंकि उसे पता था कि ये दवा बेहद महंगी होती है। जैन ने अपने सहयोगियों परवेज और नीरज चौहान के साथ मिलकर खाली शीशियों में एंटी-फंगल दवा फ्लुकोनाजोल भरा और कैंसर दवाओं की ऊंची कीमत का फायदा उठाया। ऑन्कोलॉजी विभागों में मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन और प्रबंधन की पृष्ठभूमि वाले ग्रेजुएट नीरज चौहान इस गोरखधंधे का नेटवर्क बढ़ाने के लिए जैन के साथ शामिल हुआ। चौहान ने किफायती कीमो इंजेक्शन के वादे के साथ ग्राहकों को शिकार बनाना शुरू किया। उसने भारत में कैंसर के इलाज के इच्छुक विदेशी मरीजो को टारगेट करने के लिए एक मेडिकल टूरिज्म कंपनी भी चलाई।
परवेज के जिम्मे था खाली शीशियों का इंतजाम करना
वहीं, इस खेल का तीसरा खिलाड़ी दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कैंसर अस्पताल का पूर्व फार्मासिस्ट परवेज है। उसने ऑपरेशन के लिए खाली शीशियां जुटाने का काम हाथ में लिया। परवेज ने दिल्ली के एक कैंसर अस्पताल के कर्मचारियों कोमल तिवारी और अभिनय कोहली के साथ मिलकर जैन को खाली शीशियां सप्लाई की। इन्ही खाली शीशियों में मौत की दवा भरी जाती थी। परवेज पहले एक प्रतिष्ठित अस्पताल में कीमोथेरेपी दवाओं की मिक्सिंग यूनिट में काम करता था। यहां मरीज या अस्पताल उसे दूसरी दवाओं के साथ मिश्रण करने के लिए दवाएं और इंजेक्शन देता था। उसने खाली शीशियां का इंतजाम करने के लिए बड़े अस्पतालों में काम करने वाली कोमल और अभिनय कोहली को काम पर लगाया। एक खाली शीशी की कीमत 5 हजार रुपये तक थी।
एक शीशी की कीमत 1-3 लाख रुपये
दिल्ली पुलिस ने गिरोह का भंडाफोड़ करने के लिए दो साल तक ऑपरेशन चलाया। पुलिस ने विफिल जैन, सूरज शत, नीरज चौहान, प्रवेज, कोमल तिवारी, अभिनय कोहली और तुषार चौहान को गिरफ्त में लिया है। नीरज चौहान गुरुग्राम का रहने वाला है, जबकि बाकी आरोपी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में रहते हैं। जबकि सूरज पश्चिम बंगाल का निवासी है और वह नकली दवाओं के निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए फ्लैटों की निगरानी करता था। ऑपरेशन के दौरान, 7,000 से अधिक नकली इंजेक्शन बेचे गए। हर शीशी की कीमत ₹1 से 3 लाख के बीच थी। अधिकारियों ने दवा बनाने वाली जगह से तीन कैप-सीलिंग मशीनें, एक हीट गन, 197 खाली शीशियां, 50,000 रुपये और 1,000 डॉलर नकद जब्त किए। इसके अलावा गुरुग्राम में नीरज चौहान के फ्लैट से 519 खाली बोतलें और 864 पैकेजिंग बॉक्स भी बरामद किए गए।
