Delhi Fake Cancer Drug Racket: लाचार कैंसर मरीजों को बांटी 'मौत' की दवा, कौन है मास्टरमाइंड, कैसे दिया अंजाम?

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Mar 14, 2024, 03:26 PM IST

Delhi fake cancer drug racket busted: पुलिस ऑपरेशन में ये गिरोह हाथ तो आया, लेकिन तब तक ये कई जिंदगियों से खिलवाड़ा कर चुका था। सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों में भी नकली दवा सप्लाई की गई।

Delhi fake cancer drug racket busted: दिल्ली से ऐसी खबर आई है जिसे सुनने के बाद आपका सावधान होना जरूरी है। नकली दवा से जुड़ी इस खबर ने लोगों के होश उड़ा दिए हैं। यहां एक गिरोह ने लाचार मरीजों को मौत बांटकर लाखों के वारे-न्यारे कर लिए। दवा भी उस बीमारी की दी जिसमें मौत को मात देना किसी चमत्कार से कम नहीं होता है। धंधेबाजों ने निशाना बनाया कैंसर के मरीजों को। जिंदगी की आस लगाए बैठे मरीजों को असली शीशी में नकली दवा थमा दी। पुलिस ऑपरेशन में ये गिरोह हाथ तो आया, लेकिन तब तक ये कई जिंदगियों से खिलवाड़ कर चुका था। सिर्फ भारत ही नहीं, इन्होंने विदेशों में भी नकली दवा सप्लाई की। दिल्ली के बाहर से आने वाले मरीजों को टारगेट बनाया। खासतौर से हरियाणा, बिहार, नेपाल या फिर अफ्रीकी देशों से आने वाले मरीज इनके खास निशाने पर रहते थे। कौन है इस गिरोह का मास्टरमाइंड, किस तरह इसे अंजाम दिया जाता था, आपको सबकुछ बता रहे हैं।

Fake Drugs Racket

मरीजों को कैंसर की नकली दवा बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़

मोतीनगर में चल रहा था नकली दवा का गोरखधंधा

दिल्ली पुलिस ने पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर में डीएलएफ ग्रीन्स में बड़े पैमाने पर चल रहे नकली दवा गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के लोग नकली कैंसर और कीमोथेरेपी की दवाओं से लोगों की जिंदगियों से खेल रहे थे। यहां बडे़ पैमाने पर नकली दवाओं का निर्माण और वितरण हो रहा था। इन गिरोहबाजों का काम करने का तरीका ऐसा था कि आप भी चौंक जाएंगे। इन्होंने 100 रुपये की एंटी-फंगल दवा की खाली शीशियां भरीं और उन्हें भारत, चीन और अमेरिका में जीवनरक्षक कैंसर दवाओं के रूप में 1 से 3 लाख रुपये प्रति शीशी में बेच दिया। गिरोह का भंडाफोड़ करने के लिए पुलिस का ऑपरेशन दो साल तक चला। इस दौरान इन शातिरों ने 7,000 से अधिक ऐसे इंजेक्शन बेचे।

नकली दवा गिरोह का मास्टरमाइंड विफिल जैन

दिल्ली की विशेष आयुक्त शालिनी सिंह ने बताया कि किस तरह गिरोह के सरगना ने इस काम को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि अपराध शाखा की जांच से पता चला है कि कैसे इन लोगों ने न सिर्फ दिल्ली और पड़ोसी राज्यों बल्कि बाहर के देशों के मरीजों को भी निशाना बनाया। इसका मास्टरमाइंड है बागपत का विफिल जैन है जो मोती नगर से इसे अंजाम देता था। अपना बचपन सीलमपुर में बिताने के बाद उसने 10वीं करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी। इसके बाद सीलमपुर में एक मेडिकल स्टोर में स्टोर बॉय के रूप में काम करना शुरू कर दिया। शुरुआत में उसने थोक बाजारों से स्थानीय मेडिकल स्टोर्स को दवाओं की सप्लाई शुरू की।

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