विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पूरा होने के बाद मतदाता सूची से छूट गए लोगों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए चुनाव आयोग ने अब विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। आयोग ने 1 अक्टूबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भेजे पत्र में कहा है कि छूटे हुए मतदाताओं के साथ-साथ पहली बार वोट देने के पात्र युवाओं का भी नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए।
SIR के बाद वोटर लिस्ट से छूटे नाम जोड़ने के लिए चुनाव आयोग का स्पेशल ड्राइव (फाइल फोटो- PTI)
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आयोग का यह निर्देश 29 सितंबर को जारी किए गए पत्र और 1 अक्टूबर को सभी CEOs के साथ हुई बैठक के बाद आया है। आयोग ने कहा है कि मतदाता सूची में नाम जुड़ना एक निरंतर प्रक्रिया है। ऐसे में जिन लोगों का नाम अभी तक मतदाता सूची में नहीं है या जिनका नाम किसी वजह से हट गया है, वे किसी भी समय नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस विशेष अभियान का मकसद ऐसे मतदाताओं की पहचान करना और उन्हें नामांकन की सुविधा देना है।
SIR से पहले और बाद की वोटर लिस्ट का होगा मिलान
आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि बीएलओ SIR से पहले की मतदाता सूची और मौजूदा यानी SIR के बाद की मतदाता सूची की तुलना करेंगे।
इस तुलना के आधार पर उन मतदाताओं की अलग सूची तैयार की जाएगी, जिनका नाम SIR से पहले की मतदाता सूची में था, लेकिन मौजूदा अंतिम मतदाता सूची में नहीं है।
इसके बाद BLO ऐसे मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। उनका मौजूदा स्टेटस पता किया जाएगा और यदि व्यक्ति मतदाता के रूप में पात्र पाया जाता है तो उसका फॉर्म 6 भरवाकर नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आयोग ने BLOs को इस अभियान के दौरान पहली बार वोट देने वाले और अन्य छूटे हुए पात्र मतदाताओं का भी Form 6 भरवाने का निर्देश दिया है।
एक महीने में अभियान पूरा करने का लक्ष्य
आयोग के निर्देश के मुताबिक BLO हर सप्ताह कम से कम 20-25 ऐसे मतदाताओं को कवर कर सकते हैं, ताकि यह कवायद करीब एक महीने में पूरी की जा सके। BLO को अपनी तैयार सूची में प्रत्येक मतदाता की मौजूदा स्थिति भी दर्ज करनी होगी और यह भी बताना होगा कि किन मतदाताओं का Form 6 भरवाया गया है।
राजनीतिक दलों को भी दी जाएगी सूची
इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भूमिका भी रखी गई है। BLO द्वारा तैयार सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट के साथ साझा किया जाएगा।
इसके अलावा बीएलओ फॉर्म 6 और अपने फील्ड वेरिफिकेशन की रिपोर्ट संबंधित Electoral Registration Officer (ERO) को सौंपेंगे। इसके बाद ERO कानून के प्रावधानों के तहत इन मामलों पर उचित फैसला करेगा।
बूथ स्तर पर विशेष कैंप भी लगाए जाएंगे
आयोग ने केवल घर-घर सत्यापन तक अभियान को सीमित नहीं रखा है। बूथ लेवल कैंप आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, जहां लोग मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
इसके अलावा नाइट शेल्टर, मजदूर बस्तियों, बेघर और हाशिए पर रहने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने को भी कहा गया है।
SIR के दौरान बनी ASDD सूची का भी संदर्भ
आयोग ने अपने पत्र में SIR की प्रक्रिया के दौरान तैयार हुई ASDD सूची का भी उल्लेख किया है। ASDD का मतलब Absent, Shifted, Dead और Duplicate है। SIR के enumeration phase में BLOs ने ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार की थी, जिनके नाम शामिल न होने के संभावित कारण दर्ज किए गए थे।
आयोग के मुताबिक यह सूची पंचायत भवनों, शहरी स्थानीय निकायों और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की गई थी। इसे BLAs, राजनीतिक दलों और CEO की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद दावों और आपत्तियों पर ERO के फैसले के आधार पर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई।
SIR में नाम छूटा तो अब दोबारा जुड़वाने का रास्ता
आयोग के इस ताजा निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि SIR के बाद जिन पात्र लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं है, उनकी पहचान कर उन्हें दोबारा जोड़ने की सक्रिय प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
यानी अब केवल मतदाता से यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह खुद नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करे। आयोग के निर्देश के मुताबिक BLO पहले SIR से पहले और बाद की सूची का मिलान करेंगे, फिर ऐसे लोगों की पहचान करेंगे और घर जाकर उनका वर्तमान स्टेटस पता करेंगे। पात्र पाए जाने पर Form 6 भरवाया जाएगा।
‘Logical Discrepancy’ वाले मामलों से अलग है यह प्रक्रिया
यहां ‘Logical Discrepancy’ या ‘Unmapped’ मतदाताओं और इस स्पेशल ड्राइव के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। आयोग के इस 1 अक्टूबर के पत्र में स्पेशल ड्राइव के तहत मुख्य रूप से उन लोगों की पहचान और पुनः नामांकन की बात है, जिनका नाम SIR से पहले की सूची में था लेकिन मौजूदा सूची में नहीं है।
वहीं Logical Discrepancy/Unmapped मामलों में आयोग ने अलग प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों के सत्यापन और ERO के स्तर पर निर्णय की व्यवस्था की है। इसलिए दोनों प्रक्रियाओं को एक ही श्रेणी मानना सही नहीं होगा।
हालांकि दोनों को जोड़ने वाला बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची से बाहर रह गए पात्र व्यक्ति की पहचान कैसे होगी और उसे दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का रास्ता कितना सुलभ होगा। नए निर्देश में आयोग ने इसी उद्देश्य से BLO की घर-घर पहुंच, Form 6, राजनीतिक दलों की भागीदारी और बूथ स्तर के कैंपों की व्यवस्था की है।
आयोग करेगा अभियान की निगरानी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी और ERO को अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है। साथ ही जागरूकता अभियान, शैक्षणिक संस्थानों के जरिए संपर्क, स्थानीय स्तर पर आउटरीच, SVEEP गतिविधियों और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए पात्र नागरिकों को नाम जुड़वाने के अवसर की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।
