'काम के लिए उम्र की सीमा का कोई आधार नहीं', उपराष्ट्रपति बोले- आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को किया गया अस्थिर

Vice President of India: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को तीसरे बैच के राज्यसभा इंटर्नशिप कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि काम के लिए उम्र की सीमा का कोई आधार नहीं है। व्यक्ति को हर उम्र में सक्रिय रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने आर्थिक राष्ट्रवाद अपनाने की प्रेरणा दी।

KEY HIGHLIGHTS
  • काम के लिए उम्र की सीमा का कोई आधार नहीं: उपराष्ट्रपति।
  • उपराष्ट्रपति ने इंटर्न्स को किया संबोधित।
  • उपराष्ट्रपति ने इंटर्न्स को आर्थिक राष्ट्रवाद अपनाने की प्रेरणा दी।

Vice President of India: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का कहना है कि काम के लिए उम्र की सीमा का कोई आधार नहीं है। व्यक्ति को हर उम्र में सक्रिय रहना चाहिए। तीसरे बैच के राज्यसभा इंटर्नशिप कार्यक्रम में मंगलवार को उन्होंने कहा, "हमारी भारतीय फिलॉसफी क्या है? हमारी भारतीय फिलॉसफी है 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'। आप जानते हैं, और यह बहुत कुछ कहता है, काम पूजा है। हमें अपने अंतिम सांस तक काम करते रहना चाहिए।”

vice president

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

उपराष्ट्रपति ने क्या कुछ कहा?

आपातकाल के दौर को याद करते हुए धनखड़ ने कहा, “हमारे लोकतंत्र को एक बार आपातकाल के दौरान अस्थिर किया गया था। उनमें से कितने प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, गवर्नर, राष्ट्रपति बने? क्योंकि, आप शायद भूल गए होंगे, आप जानिए कि लोकतंत्र में उन लोगों को जो हमारे लोकतंत्र में बाद में योगदान देने वाले थे, जेल में क्यों डाला गया? उन्हें कभी नहीं पता था कि वे कब बाहर आएंगे। उस समय सुप्रीम कोर्ट कैसे विफल हो गया? सिर्फ राष्ट्र ही नहीं, लोकतंत्र, मानवता और कैसे नौ उच्च न्यायालय ने नागरिकों की मदद के लिए कदम बढ़ाया। सभी नौ को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। आपको इसका अध्ययन करना होगा।"

End of Feed