दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय वायु सेना के विमान से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से संबंधित सूचना का खुलासा करने के केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा तथा प्रधानमंत्री के जीवन और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। उच्च न्यायालय ने कहा कि आवेदक यह साबित करने में विफल रहा कि इस जानकारी का खुलासा करने के लिए पर्याप्त व्यापक जनहित है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 15 अक्टूबर को दिए आदेश में कहा, 'केवल इस तथ्य से कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सरकारी धन खर्च किया गया है, ऐसी जानकारी का खुलासा करना उचित नहीं हो जाता। इससे इन यात्राओं के लिए किए गए सुरक्षा इंतजामों से समझौता हो सकता है।'
आदेश में कहा गया, 'इन चिंताओं से अधिक महत्वपूर्ण व्यापक जनहित साबित नहीं होने की स्थिति में मांगी गई जानकारी का खुलासा करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।'उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि सीआईसी के उस आदेश में खामी थी, जिसमें प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से संबंधित ’स्पेशल फॉरेन रिटंर्स’ (एसएफआर)-2 का ब्योरा सुरक्षा कर्मियों के नाम और उनकी पहचान से जुड़ी जानकारियां हटाने के बाद सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था।
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ये रिकॉर्ड सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा ने मांगे थे
अदालत वायु सेना मुख्यालय के कार्मिक सेवा निदेशालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में जुलाई 2020 में केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उपलब्ध और प्रासंगिक एसएफआर-2 रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। रिकॉर्ड सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा ने मांगे थे। उन्होंने सूचना का अधिकारआवेदन दायर कर एक अप्रैल 2013 से पांच जून 2018 के बीच भारतीय वायु सेना के विमानों से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश यात्राओं से संबंधित जानकारी मांगी थी।
