Defence Acquisition Council Meeting: भारत ने अपनी सैन्य क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 26 दिसंबर को रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council–DAC) की अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में मिसाइलों और अन्य हथियार प्रणालियों की आपात खरीद (Emergency Procurement ) पर फैसला लिया जाएगा। दरअसल, मोदी सरकार का लक्ष्य है कि सशस्त्र बलों तक तेजी से हथियार पहुंचाए जाएं।
डीएसी सशस्त्र बलों के लिए आपातकालीन खरीद (EP) के एक और दौर पर निर्णय लेगा। (फोटो सोर्स: ANI)
सूत्रों के मुताबिक, थलसेना, नौसेना और वायुसेना की तत्काल जरूरतों को देखते हुए एक और ईपी राउंड को मंजूरी मिल सकती है। इससे पहले आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) का एक चरण 19 नवंबर को समाप्त हुआ था, लेकिन कई सौदे पूरे नहीं हो पाए थे।
नौसेना ने मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MR-SAM) की बड़ी मांग रखी है। करीब 700 से अधिक मिसाइलों की जरूरत बताई गई है। यह मिसाइल डीआरडीओ और एक इजरायली कंपनी के संयुक्त विकास का परिणाम है, जबकि इसका निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) करती है।
करीब 70 किलोमीटर की रेंज वाली MR-SAM दुश्मन के विमान, मिसाइल, ड्रोन और हेलिकॉप्टर को मार गिराने में सक्षम है। पिछले लगभग एक दशक से यह नौसेना के बड़े युद्धपोतों पर तैनात है। थलसेना और भारतीय वायुसेना के पास भी यह प्रणाली पहले से मौजूद है।
IAF और Navy के लिए Astra Mark-2 मिसाइल
बैठक में अस्त्र मार्क-2 (Astra Mk-2) एयर-टू-एयर मिसाइल पर भी चर्चा होने की संभावना है। डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही यह बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल करीब 200 किलोमीटर की रेंज की होगी। भारतीय वायुसेना 600 से अधिक एस्ट्रा मार्क-2 (Astra Mk-2) मिसाइलें लेने की योजना पर काम कर रही है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इस मिसाइल से वायुसेना जरूरत पड़ने पर भारत की सीमा के भीतर रहते हुए ही दुश्मन के विमान को निशाना बना सकेगी।
हालिया ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के अनुभवों में लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों की जरूरत पर ध्यान दिया गया है। फिलहाल वायु सेना (IAF) के पास Astra Mk-1 है, जबकि Astra Mk-3 पर भी काम चल रहा है।
SPICE म्यूनिशन की भी खरीद संभव
इजरायल में विकसित SPICE प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन (हालांकि यह मिसाइल नहीं है) भी एजेंडे में शामिल है। भारतीय वायुसेना ने 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक में इसका इस्तेमाल किया था। यह सिस्टम मजबूत है और बंकर जैसे लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद वायुसेना ने इन्हें “प्रूव्ड वेपन” मानते हुए 300 से अधिक SPICE म्यूनिशन खरीदने की जरूरत जताई है।
थलसेना के लिए नए रडार
बता दें कि थलसेना ने लो-लेवल और हल्के रडार सिस्टम की मांग रखी है। सेना के पास पहले से ही 3D अश्लेषा (3D Aslesha) और 2D भारणी रडार हैं, जिन्हें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने विकसित किया है। अब दो दर्जन से ज्यादा नए रडार खरीदे जाने की जरूरत बताई गई है। ये रडार अक्षीयर (Akasheer) जैसे व्यापक कमांड और रिपोर्टिंग सिस्टम का हिस्सा होंगे, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चार दिनों के संघर्ष में अच्छा प्रदर्शन किया था।
क्या है Emergency Procurement System?
आपात खरीद प्रणाली (Emergency Procurement System) के तहत रक्षा मंत्रालय सीमित संख्या में हथियारों की तेज खरीद कर सकता है। आम तौर पर प्रत्येक सिस्टम के लिए करीब 300 करोड़ रुपये तक का बजट तय किया जाता है। इसका इस्तेमाल मिसाइल, गोला-बारूद, छोटे हथियार और एंटी-टैंक सिस्टम जैसी जरूरतों के लिए किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि 26 दिसंबर की बैठक में ईपी के लिए समय सीमा बढ़ाने और अतिरिक्त फंड आवंटन पर भी फैसला हो सकता है ताकि लंबित सौदों को पूरा किया जा सके।
DAC में कौन-कौन होते हैं शामिल?
डीएसी की बैठक में रक्षा मंत्री के अलावा राज्य मंत्री (रक्षा), चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और डीआरडीओ प्रमुख शामिल होते हैं। कुल मिलाकर, 26 दिसंबर की बैठक से पहले ही यह साफ है कि भारत की सैन्य तैयारियों को तेज धार देने के लिए मिसाइल और रक्षा प्रणालियों पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
