हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने कहा था कि रामचरित्रमानस (Ramcharitmanas) के कुछ हिस्सों में कुछ जातियों और संप्रदायों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और कटाक्ष हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए। उसके बाद उनके बयानों को लेकर उन्हें निशाना बनाया जाने लगा कि वह भगवान राम के खिलाफ हैं। इसी बीच उनकी बेटी और बीजेपी सांसद संघमित्रा मौर्य (Sanghamitra Maurya) ने कहा कि उनका बयान विवाद का नहीं, चर्चा का विषय है। विश्लेषण किया जाना चाहिए और चर्चा की जानी चाहिए कि रामचरित्रमानस की एक खास लाइन पर बार-बार विवाद क्यों हो रहा है? कुछ लोग अनावश्यक मुद्दों को उठा रहे हैं और अशांति पैदा करने के लिए विवाद खड़ा कर रहे हैं।
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य
संघमित्रा मौर्य बुधवार को अपने पिता और समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरितमानस पर उनकी टिप्पणी के समर्थन में आईं और कहा कि हिंदू महाकाव्य के कुछ हिस्सों पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस के जिस चौपाई (श्लोक) को उनके पिता ने आपत्तिजनक बताया है, उसकी चर्चा विद्वानों से करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने रामचरितमानस पढ़ी है। हालांकि, इस संबंध में मेरी उनसे बात नहीं हुई है। लेकिन अगर उन्होंने एक चौपाई का जिक्र किया है तो शायद इसलिए कि वह पंक्ति स्वयं भगवान राम के चरित्र के विपरीत है। रामचरितमानस पर अपने पिता की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर बदायूं से बीजेपी सांसद ने मीडिया से कहा कि जब भगवान राम ने जाति को महत्व दिए बिना शबरी के बेर खाए, तो उस चौपाई में उनकी जाति का वर्णन किया गया है। स्वामी प्रसाद मौर्य पर उनकी विवादित टिप्पणी के लिए मामला दर्ज किया गया है।
Not a matter of controversy but discussion. Should be analysed & discussed why is controversy erupting again & agai… t.co/cICgG9262Y
— ANI (@ANI) Jan 26, 2023
संघमित्रा ने कहा कि उनके पिता ने विशेष श्लोक उद्धृत किया क्योंकि उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा था। इसलिए, हमें लगता है कि एक स्पष्टीकरण होना चाहिए। यह मीडिया में बहस का विषय नहीं है। हमें लगता है कि यह विश्लेषण का विषय है। उन्होंने कहा कि इस पर विद्वानों से चर्चा की जानी चाहिए। जब हम ईश्वर के विपरीत कुछ पाते हैं, तो हमें एक स्पष्टीकरण की आवश्यकता होती है। संघमित्रा ने दावा किया कि महान कवयित्री महादेवी वर्मा की एक कविता में भी इस चौपाई को लेकर सवाल किया गया था, उन्होंने भी कहा था कि वह हैरान हैं कि किसी महिला ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। उन्होंने कहा कि वह (मौर्य) मेरे पिता हैं, मैं उनका बचाव नहीं कर रही हूं, बल्कि मैं कह रही हूं कि अगर कोई व्यक्ति कुछ भी बात करता है, तो हमें तब तक कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए जब तक हम उसकी बात को पूरी तरह से समझ नहीं लेते।
उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में रामचरितमानस के कुछ छंदों पर जाति के आधार पर समाज के एक बड़े वर्ग का "अपमान" करने का आरोप लगाकर एक विवाद खड़ा कर दिया और मांग की कि इन पर प्रतिबंध लगाया जाए। रामचरितमानस, अवधी भाषा की एक महाकाव्य कविता है, जो रामायण पर आधारित है और इसकी रचना 16वीं शताब्दी के भक्ति कवि तुलसीदास ने की है।
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