कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को लेकर विवाद बढ़ गया है। सीजेपी ने आरोप लगाया है कि दोनों की रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है और अदालत की कार्यवाही को टालने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि दोनों को हिरासत में बनाए रखने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है।
सौरव दास, आशुतोष रांका।
सीजेपी नेता रत्ना सिंह ने दावा किया कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) तय समय पर नहीं पहुंचे, जिसके कारण सुनवाई प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चार जमानतदारों को अस्पष्ट आधारों पर खारिज कर दिया गया। पुलिस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
सुनवाई में देरी और जमानतदारों को खारिज करने का आरोप
रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वह सुबह 11 बजे से पुलिस स्टेशन में मौजूद थीं, जबकि सुनवाई दोपहर 12 बजे निर्धारित थी। उनके मुताबिक, शाम 4:42 बजे तक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP/SEM) मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन नहीं पहुंचे थे। सिंह ने आरोप लगाया कि अब तक चार जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से खारिज किया जा चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के कारण जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हैं, उन्हें आपराधिक पृष्ठभूमि वाला बताया जा रहा है। एक अन्य पोस्ट में सिंह ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध नहीं है और प्रक्रियागत देरी के कारण दोनों नेताओं को हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए।उन्होंने दिल्ली में SEM अदालतों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। रत्ना सिंह ने कहा, उच्च अदालतें अधिकारियों को न्यायिक व्यवस्था के निर्धारित पदानुक्रम का पालन करने के निर्देश दे चुकी हैं। उन्होंने मौजूदा स्थिति को शक्तियों के कथित दुरुपयोग का मामला बताया।
कपिल सिब्बल से सलाह लेने का दावा
CJP ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि उसने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह ली है। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वह उन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा, जिन पर उसने दोनों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखवाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा था कि दोनों के खिलाफ कोई अपराध किए जाने या आरोप लगाए जाने की स्थिति में उन्हें हिरासत में रखने के लिए जानबूझकर देरी की रणनीति अपनाने का विरोध किया जाएगा। संगठन ने इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बात भी कही थी।बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। दोनों पर जंतर-मंतर तक पहुंचने के लिए निजी संपत्ति में कथित तौर पर अतिक्रमण करने और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है। दोनों फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं।
पुलिस के अनुसार, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने निवारक पुलिस रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों, कानून के कथित बार-बार उल्लंघन और इस आशंका पर विचार किया कि जमानत पर रिहा होने के बाद दोनों फिर कानून का उल्लंघन कर सकते हैं और अन्य लोगों को भी इसके लिए उकसा सकते हैं। इसके बाद उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे नेता
सीजेपी के दोनों नेताओं को मंगलवार तड़के हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि वे 11 अन्य कार्यकर्ताओं के साथ बैरिकेड तोड़कर बिना अनुमति जंतर-मंतर क्षेत्र में दाखिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया। पुलिस ने बताया कि सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार को भी हिरासत में लिया गया था। उस समय उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण का बॉन्ड भरा था।
