भारत में बांग्लादेश और फ्रांस जैसी हिंसा की साजिश रचे जाने के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के आरोपों पर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि अगर सरकार को पता है कि देश में बड़ी साजिश हो रही है और कुछ राजनेता इसमें शामिल हैं, तो उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? उन्होंने सरकार से आरोपों के समर्थन में सबूत सामने रखने की मांग की।
राशिद अल्वी ने कहा,'निश्चित रूप से, भारत न तो बांग्लादेश है, न श्रीलंका, न नेपाल, लेकिन मैं किरेन रिजिजू से पूछना चाहता हूं कि कौन से राजनेता साजिश रच रहे हैं? और क्या विरोध प्रदर्शन कर रहे ये युवा देशद्रोही हैं? क्या वे भारत के खिलाफ हैं? उन्हें अपनी बात स्पष्ट करने का मौका दिया जाना चाहिए। आप सरकार में हैं, और अगर आपको पता है कि एक बड़ी साजिश चल रही है, तो आपने उन राजनेताओं को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? आपके इस कदम को देशद्रोह क्यों न माना जाए? आपको पता है कि भारत के खिलाफ साजिश हो रही है, और आपके अनुसार, कुछ ऐसे नेता इसे अंजाम दे रहे हैं, और वे खुलेआम घूम रहे हैं?... झूठ बोलना बंद करो। देश की जनता आपके खिलाफ है...'
किरेन रिजिजू ने क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को आरोप लगाया कि भारत में भी वैसी ही साजिश रची जा रही थी, जैसी बांग्लादेश में हिंसा और फ्रांस में दंगों तथा लूटपाट के दौरान देखने को मिली थी। उन्होंने भारत-विरोधी समूहों और कुछ राजनेताओं पर युवाओं को भड़काने तथा सड़कों पर हिंसा फैलाने के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया।
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बांग्लादेश की हिंसक घटनाओं और फ्रांस में दंगे-लूटपाट जैसी साजिश भारत में भी रची गई थी। उनके मुताबिक, कथित साजिश में शामिल लोग यह भूल गए कि भारत न बांग्लादेश है और न फ्रांस। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल चुनावों के जरिए हो सकता है, न कि अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के प्रभाव से। हालांकि, रिजिजू ने अपने आरोपों के समर्थन में जिन लोगों या समूहों का उल्लेख किया, उनके बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
प्रशांत भूषण के 'सत्ता परिवर्तन' वाले बयान से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी के बाद तेज हुआ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भूषण ने कहा था कि विपक्ष फिलहाल चुनावों को निष्पक्ष बनाने के लिए लड़ रहा है,लेकिन अगर कथित ज्यादतियां जारी रहीं तो सत्ता परिवर्तन होगा। उन्होंने सवाल किया था कि सत्ता परिवर्तन की मांग करने में गलत क्या है। उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी ने खुद सत्ता बदलने के लिए कई आंदोलन किए हैं, ऐसे में अब सत्ता परिवर्तन की बात को साजिश के तौर पर क्यों पेश किया जा रहा है।
बीजेपी ने इस बयान को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष युवाओं के आंदोलनों का इस्तेमाल सरकार को अस्थिर करने के लिए कर रहा है। वहीं,विपक्षी नेताओं ने सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को बदनाम करने और असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
राजनाथ सिंह और कपिल सिब्बल भी आमने-सामने
इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन चाहती है और युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए कर रही है। इसके जवाब में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि सत्ता परिवर्तन की इच्छा जनता की ओर से भी हो सकती है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उसके जाने का समय आ गया है।
