Chief Justice of India: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई (बी आर गवई) ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वे रिटायरमेंट के बाद कोई भी शासकीय लाभ का पद स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद वे अपना अधिकतर समय दारापूर, अमरावती और नागपुर में ही बिताना पसंद करेंगे। मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद पहली बार भूषण गवई अपने पैतृक गांव दारापूर पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने अपने पिता की 10वीं पुण्यतिथि पर उनके स्मारक स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गांव पहुंचते ही उन्होंने अपने बचपन के घर का दौरा किया और पुरानी यादों को ताज़ा किया।
कानून को लेकर सख्त, लेकिन अपनों के लिए सरल हैं CJI, गांव पहुंच कर हुए भावुक
गांव में उनके आगमन पर लोगों में उत्साह का माहौल था। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश का स्वागत किया। गवई ने इस दौरान गांव की मिट्टी और अपने बचपन से जुड़ी बातों को भावुक होकर साझा किया। सीजेआई गवई ने कहा कि मैं रिटायरमेंट के बाद किसी भी प्रकार का शासकीय लाभ का पद नहीं स्वीकार करूंगा..मेरा इरादा है कि मैं ज़्यादा से ज़्यादा वक्त दारापूर, अमरावती और नागपुर में बिताऊं।
चीफ जस्टिस गवई ने अपने संबोधन में कहा, "यह कुर्सी जनता की सेवा के लिए है, न कि घमंड के लिए. कुर्सी अगर सिर में चढ़ जाए, तो यह सेवा नहीं, बल्कि पाप बन जाती है। उनका यह बयान न्यायपालिका और प्रशासनिक पदों पर बैठे हर व्यक्ति के लिए एक चेतावनी की तरह था।
सीजेआई ने सिर्फ प्रशासनिक अफसरों को ही नहीं...बल्कि न्यायाधीशों और वकीलों को भी उनके व्यवहार के लिए खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा, "न्यायाधीशों को वकीलों को सम्मान देना चाहिए। यह अदालत वकील और न्यायाधीश दोनों की है।"
